ट्रंप के बयान पर भड़कीं मेलोनी: पोप के समर्थन में इटली की प्रधानमंत्री

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पोप के खिलाफ की गई टिप्पणियों को 'अस्वीकार्य' बताया है। मेलोनी ने वेटिकन के प्रति एकजुटता जताते हुए धार्मिक स्वतंत्रता में राजनीतिक हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया और चर्च की स्वायत्तता का समर्थन किया।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रोम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मेलोनी ने ट्रंप की टिप्पणियों को 'अस्वीकार्य' करार दिया और वेटिकन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया और उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक नेतृत्व के अधीन नहीं होना चाहिए और वह पोप फ्रांसिस के साथ मजबूती से खड़ी हैं। यह विवाद उस समय गहरा गया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोप और चर्च की नीतियों की आलोचना की थी।

मेलोनी का कड़ा रुख और वेटिकन का समर्थन

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह ऐसे समाज में सहज महसूस नहीं करेंगी जहां धार्मिक नेताओं को राजनीतिक निर्देशों का पालन करना पड़े। उन्होंने वेटिकन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मेलोनी के अनुसार, पोप के प्रति दिए गए बयान न केवल अनुचित हैं बल्कि वे एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका विरोध व्यक्तिगत न होकर सिद्धांतों पर आधारित है।

ट्रंप की विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट

विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोप के खिलाफ कई पोस्ट किए। इन पोस्टों में एक AI-जनरेटेड तस्वीर भी शामिल थी, जिसमें ट्रंप को यीशु मसीह के समान दिखाया गया था। इस तस्वीर और संबंधित बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। हालांकि, भारी आलोचना और विवाद के बाद ट्रंप के सोशल मीडिया हैंडल से उस पोस्ट को हटा दिया गया, लेकिन तब तक इसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी।

पोप की नीतियों और युद्ध पर टिप्पणी

पोप लियो XIV ने हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल की विदेश नीतियों, विशेषकर ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर खुलकर अपनी राय रखी है। कैथोलिक चर्च के प्रमुख ने युद्धों के पीछे 'सर्वशक्तिमान होने के भ्रम' की आलोचना की थी। उन्होंने सैन्य कदमों को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताते हुए कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। पोप के इन बयानों ने अमेरिकी प्रशासन के कुछ वर्गों में नाराजगी पैदा की थी, जिसके बाद ट्रंप ने उन पर पलटवार किया था।

धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप

मेलोनी ने अपने संबोधन में धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चर्च और राज्य के बीच एक स्पष्ट विभाजन होना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें पीट हेगसेथ जैसे नेता शामिल हैं, पर भी निशाना साधा। आरोप है कि कुछ अमेरिकी नेता ईसाई धर्म का इस्तेमाल अपनी सैन्य और राजनीतिक हिंसा को सही ठहराने के लिए कर रहे हैं। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि धर्म का उपयोग राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करना गलत है और वह इसके खिलाफ वेटिकन का समर्थन करती रहेंगी।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रभाव

इटली और अमेरिका के बीच इस वैचारिक मतभेद ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। मेलोनी, जिन्हें अक्सर ट्रंप के करीब माना जाता रहा है, का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वेटिकन और कैथोलिक मूल्यों के मुद्दे पर वह कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं। रोम और वाशिंगटन के बीच इस तनाव का असर आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, इटली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।