भारत से चीन तक तीन घंटे में भूकंप के झटके, चार देशों में सहमे लोग: जानिए क्या है पूरा मामला

भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में शुक्रवार सुबह महज 3 घंटे के भीतर भूकंप के झटके महसूस किए गए। सबसे तेज झटका पाकिस्तान में 4.9 तीव्रता का दर्ज किया गया।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर की सुबह भारत से लेकर चीन तक चार देशों की धरती अचानक कांप उठी, जिससे आम जनजीवन में खौफ का माहौल पैदा हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 3 घंटे 22 मिनट के अंदर चार अलग-अलग देशों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इन देशों में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन शामिल हैं और 9 के बीच दर्ज की गई। इस सिलसिलेवार भूकंप की शुरुआत भारत से हुई और इसके बाद पड़ोसी देशों में भी धरती हिलने लगी। सुबह के वक्त आए इन झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया।

भारत के शिमला में तड़के आया भूकंप

भारत में शुक्रवार तड़के 2 बजकर 43 मिनट पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए। 7 मापी गई। इसका केंद्र जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। चूंकि इस भूकंप की तीव्रता काफी कम थी, इसलिए इसे हल्की श्रेणी का माना गया। शिमला और उसके आसपास के इलाकों में आए इस हल्के झटके के कारण किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, फिर भी लोग एहतियात के तौर पर सतर्क हो गए थे।

पाकिस्तान में दर्ज की गई सबसे ज्यादा तीव्रता

भारत के बाद पाकिस्तान में सुबह 4 बजकर 56 मिनट पर धरती डोल उठी। 9 मापी गई, जो इन चारों देशों में शुक्रवार को दर्ज किए गए सभी भूकंपों में सबसे ज्यादा थी। मौसम विज्ञान और भूगर्भ विभाग के अनुसार, इस मध्यम तीव्रता के भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 15 किलोमीटर की गहराई में था। केंद्र की कम गहराई होने के कारण इसके झटके काफी दूर तक और तेज महसूस किए गए, जिससे पाकिस्तानी नागरिकों में गहरी दहशत फैल गई। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है।

अफगानिस्तान में भी महसूस किए गए झटके

पाकिस्तान के ठीक बाद पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए। अफगानिस्तान में शुक्रवार की सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर धरती हिली। 1 मापी गई। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे करीब 25 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अफगानिस्तान पहले से ही भूकम्प के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, और इस नए झटके ने एक बार फिर स्थानीय लोगों को डरा दिया। हालांकि, यहां भी किसी बड़े नुकसान की तत्काल खबर नहीं मिली है।

तिब्बत में एक बार फिर हिली धरती, आफ्टरशॉक का खौफ

4 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। तिब्बत में आए इस भूकंप को लेकर चिंता का स्तर सबसे ज्यादा था, क्योंकि इसके ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार शाम को इसी क्षेत्र में 7 तीव्रता का एक बेहद विनाशकारी और बड़ा भूकंप आया था। गुरुवार को आए उस भयानक भूकंप के कारण कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी थी और भारी तबाही मची थी। 4 तीव्रता का यह झटका असल में उसी बड़े भूकंप का एक आफ्टरशॉक (उत्तर-कंपन) था, जिसने बचे हुए लोगों की धड़कनों को और तेज कर दिया।

आखिर क्या होता है आफ्टरशॉक?

विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में कोई बड़ा और शक्तिशाली भूकंप आता है, तो उसके बाद जमीन के अंदर मौजूद चट्टानों में तनाव और हलचल का दौर जारी रहता है। इस आंतरिक हलचल के कारण मुख्य भूकंप के केंद्र के आसपास या उसी फॉल्ट लाइन पर बार-बार छोटे झटके आते रहते हैं, जिन्हें आफ्टरशॉक (Aftershock) कहा जाता है। ये आफ्टरशॉक बड़े भूकंप के आने के कई दिनों या हफ्तों बाद तक भी महसूस किए जा सकते हैं। 4 तीव्रता का झटका इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा था, जिसने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया।