छठ पूजा 2025 / खरना आज, 36 घंटे के निर्जला व्रत का होगा शुभारंभ; जानें विधि और महत्व

आज छठ पूजा का दूसरा दिन खरना है, जो आस्था के महापर्व का महत्वपूर्ण चरण है। इस दिन व्रती निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को गुड़ की खीर व रोटी का प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं। खरना शुद्धता और भक्ति का प्रतीक है, जिससे छठी मैया का घर में प्रवेश होता है।

आस्था का महापर्व छठ पूजा 2025 के दूसरे दिन आज खरना है। 25 अक्टूबर से शुरू हुए इस चार दिवसीय अनुष्ठान का। यह महत्वपूर्ण चरण है, जिसका समापन 28 अक्टूबर को होगा। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए धूमधाम से मनाया जाता है। खरना का दिन छठ पूजा के कठिन तपस्या की नींव रखता है, क्योंकि इसी दिन से 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।

खरना का आध्यात्मिक महत्व

खरना का शाब्दिक अर्थ 'शुद्धता' है, और यह दिन व्रतियों के लिए शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण का प्रतीक है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरना के दिन ही छठी मैया का घर में प्रवेश होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। यह दिन पूरी तरह से भक्ति, समर्पण और कठोर तपस्या का प्रतीक है। व्रती इस दिन अपने मन को सभी सांसारिक इच्छाओं से मुक्त कर केवल ईश्वर के प्रति समर्पित करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा। करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में खुशहाहाली आती है।

खरना की व्रत विधि और प्रसाद

खरना के दिन व्रती सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए कठोर उपवास रखती हैं। शाम को, सूर्य ढलने के बाद, व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं। इस दिन विशेष रूप से मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी का उपयोग करके गुड़ और चावल की खीर, जिसे 'रसियाव' भी कहते हैं, और रोटी या पूड़ी बनाई जाती है। यह प्रसाद अत्यंत पवित्र माना जाता है और पूजा के बाद, सबसे पहले व्रती स्वयं इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्य, मित्र और रिश्तेदार इसे बांटकर खाते हैं। यह प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही व्रती का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो अगले दिन। शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने और उसके अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।

छठ पूजा का दूसरा दिन: तैयारी और परंपराएं

खरना का दिन छठ पूजा की भव्यता और पवित्रता को दर्शाता है और इस दिन से ही घर में छठ के गीत गूंजने लगते हैं और पूरे वातावरण में एक अलग ही भक्तिमय ऊर्जा का संचार होता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रसाद बनाने और पूजा की तैयारी में जुट जाते हैं। इस दिन के बाद व्रती किसी भी प्रकार का भोजन या जल ग्रहण नहीं करतीं। यह व्रत न केवल शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक शक्ति का भी प्रतीक है। खरना के प्रसाद को ग्रहण करने के बाद, व्रती अगले दो दिनों तक। केवल जल पर ही निर्भर रहती हैं, जो उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

खरना के लिए मंत्र

छठ पूजा के दूसरे दिन, खरना के अवसर पर, सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। ये मंत्र भक्ति और एकाग्रता को बढ़ाते हैं।

ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा 

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः 

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकंपय मां भक्त्या गृहाणार्ध्य दिवाकर:।।

ये मंत्र सूर्य देव की महिमा और छठी मैया की कृपा को समर्पित हैं, और इनके जाप से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। खरना का यह पवित्र दिन छठ पूजा की आध्यात्मिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो व्रतियों को आगे के कठिन व्रत के लिए तैयार करता है।

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