हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार बेहद खास और महत्वपूर्ण माना गया है, जो दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले मनाया जाता है। इस दिन लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तमाम तरह की चीजों की खरीदारी करते हैं और मान्यता है कि धनतेरस के इस शुभ अवसर पर सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदना बेहद शुभ और फलदायी होता है। इसके अलावा, कुछ लोग इस दिन विशेष रूप से झाड़ू और साबुत धनिया भी खरीदते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर खरीदारी करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में हमेशा धन-धान्य बना रहता है। इस शुभ अवसर पर लोग जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार भगवान धन्वंतरि, धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी के साथ ही कुबेर देव का पूजन करने से घर में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और परिवार के किसी भी सदस्य को जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। यदि आपने भी इस बार धनतेरस के मौके पर सोना, चांदी, साबुत धनिया, नए बर्तन, झाड़ू या फिर अपनी पसंद का कोई भी अन्य सामान खरीदा है, तो उसे अपने घर लाने के बाद आपको सबसे पहले एक विशेष और महत्वपूर्ण काम जरूर करना चाहिए। तभी आपको उस खरीदारी का पूर्ण और शुभ फल मिल पाएगा और आइए विस्तार से जानते हैं कि धनतेरस की खरीदारी के बाद घर पर क्या-क्या करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं।
धनतेरस पर खरीदारी के बाद क्या करें
धनतेरस के दिन बाजार से सोना, चांदी, नए बर्तन या झाड़ू खरीदकर जब आप अपने घर वापस लाते हैं, तो सबसे पहले उन सभी खरीदी गई वस्तुओं का विधि-विधान के साथ स्वागत और पूजन किया जाता है। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार हर वस्तु के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
बर्तनों को घर लाने के नियम
धनतेरस के दिन खरीदे गए नए बर्तन को कभी भी घर में खाली हाथ या खाली करके नहीं लाना चाहिए और परंपरा के अनुसार, घर लाने से ठीक पहले या घर में प्रवेश करते ही उस नए बर्तन में जल, चावल, चीनी या फिर किसी प्रकार की मिठाई भर देनी चाहिए। इसके बाद उन नए बर्तनों को भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी के समक्ष आदरपूर्वक रखना चाहिए और रोली तथा अक्षत से उनका तिलक करना चाहिए। ऐसा करने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है और अन्न तथा धन के भंडार भरे रहते हैं।
सोना और चांदी की खरीदारी के बाद
यदि आपने धनतेरस के शुभ अवसर पर सोने या चांदी के आभूषण यानी गहने या फिर सिक्के खरीदे हैं, तो घर लाने पर सबसे पहले उन्हें पवित्र गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद उन स्वर्ण या रजत वस्तुओं को माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के चरणों में रखकर उनकी विधिवत पूजा करनी चाहिए और पूजा संपन्न होने के बाद इन्हें एक साफ लाल या पीले रंग के पवित्र कपड़े में बांधकर अपने घर की तिजोरी या फिर धन रखने वाले मुख्य स्थान पर सुरक्षित रख देना चाहिए।
नई झाड़ू को घर लाने पर करें यह उपाय
सनातन संस्कृति में नई झाड़ू को सीधे तौर पर मां लक्ष्मी का रूप माना गया है और इसलिए इसे घर लाने के बाद झाड़ू पर सबसे पहले पवित्र गंगाजल छिड़कना चाहिए, उसके बाद उस पर मौली यानी कलावा बांधना चाहिए और फिर कुमकुम व अक्षत से उसकी पूजा करनी चाहिए। इसके बाद इस नई झाड़ू को किसी ऐसी गुप्त या सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए जहां बाहरी लोगों की नजर आसानी से न पड़े। नई झाड़ू का प्रयोग उसी दिन या फिर दीपावली से ठीक पहले घर की हल्की-फुल्की सफाई करके शुरू किया जाना चाहिए।
साबुत धनिया के पूजन और प्रयोग के नियम
धनतेरस के दिन बाजार से साबुत धनिया खरीदकर घर लाने के बाद सबसे पहले उसे मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मुख्य पूजा में अर्पित करना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद थोड़े से साबुत धनिए को उठाकर एक साफ लाल या पीले रंग के कपड़े में बांधकर एक छोटी सी पोटली बना लेनी चाहिए और इसे अपनी तिजोरी, अलमारी या फिर घर में धन रखने वाले स्थान पर रख देना चाहिए। इसके अलावा, बचे हुए साबुत धनिए के कुछ बीजों को दीपावली की पूजा के तुरंत बाद अपने घर के आंगन, किसी गमले या फिर बगीचे की मिट्टी में बो देना चाहिए। थोड़े से धनिए का इस्तेमाल पूजा के प्रसाद के रूप में यानी धनिया पंजीरी बनाने के लिए या फिर दैनिक भोजन में भी किया जा सकता है, जो बेहद शुभ माना जाता है।
