गौतम अडानी की यूरोप की बड़ी ऊर्जा कंपनी पर नजर, जानें पूरी रिपोर्ट और मुख्य बातें

अरबपति गौतम अडानी डच एनर्जी स्टोरेज ग्रुप VTTI को खरीदने पर विचार कर रहे हैं, जिसका वैल्यूएशन करीब 3 अरब यूरो आंकी गया है।

भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज और देश के सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी एक बार फिर बड़े वैश्विक अधिग्रहण की तैयारी में जुट गए हैं। मामले की जानकारी रखने वाले करीबी लोगों के अनुसार, अरबपति गौतम अडानी डच एनर्जी स्टोरेज ग्रुप VTTI को खरीदने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के कारण एनर्जी ट्रेडिंग और फ्यूल स्टोरेज के लिए VTTI जैसी सुविधाएं और भी अधिक महत्वपूर्ण और कीमती हो गई हैं।

VTTI को खरीदने की दौड़ में शामिल अडानी ग्रुप

विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि अडानी ग्रुप, जो बंदरगाहों यानी पोर्ट्स से लेकर बिजली उत्पादन तक का विशाल कारोबार संभालता है, उन प्रमुख कंपनियों में शामिल है जो रॉटरडैम स्थित VTTI को खरीदने के लिए वैल्यूएशन का आकलन कर रही हैं और इस संभावित और बड़े सौदे में VTTI की कुल वैल्यू लगभग 3 अरब यूरो आंकी जा सकती है, जो भारतीय मुद्रा के अनुसार लगभग 33 हजार करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं के बीच यह रणनीतिक कदम अडानी समूह के एनर्जी पोर्टफोलियो को वैश्विक स्तर पर एक नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

VTTI की हिस्सेदारी और उसके कामकाज का दायरा

डच एनर्जी स्टोरेज ग्रुप VTTI के मालिकाना हक की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजर IFM इन्वेस्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और प्रसिद्ध एनर्जी व कमोडिटी ग्रुप विटोल SA की इस कंपनी में लगभग 45-45 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इसके अलावा, बची हुई शेष 10 प्रतिशत हिस्सेदारी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC के पास है। गोपनीय जानकारी होने के कारण अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर सूत्रों ने बताया है कि ADNOC इस डील के माध्यम से VTTI से अपनी पूरी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही, कंपनी के अन्य मालिक भी इस मेगा डील के जरिए अपनी हिस्सेदारी को कम करने या बेचने पर विचार कर सकते हैं।

सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में अभी बातचीत का दौर जारी है और यह अभी पूरी तरह से पक्का नहीं है कि इस चर्चा से कोई अंतिम डील हो ही जाएगी। इसके अलावा, बाजार में अन्य दूसरे बोली लगाने वाले भी VTTI में अपनी हिस्सेदारी खरीदने या नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। VTTI दुनियाभर में बड़े-बड़े टर्मिनल और स्टोरेज सुविधाएं संचालित करती है, जिनका मुख्य इस्तेमाल फ्यूल और केमिकल को सुरक्षित स्टोर करने के लिए किया जाता है। इन केमिकल्स और ईंधनों में फॉसिल फ्यूल, बायोफ्यूल और विभिन्न प्रकार के सॉल्वैंट्स शामिल हैं, और इस कंपनी का पूरा कारोबारी नेटवर्क दुनिया भर के कई देशों में फैला हुआ है।

भारत के सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी का बढ़ता दायरा

7 अरब डॉलर आंकी गई है। अडानी ग्रुप के विशाल और विविधीकृत पोर्टफोलियो में एयरपोर्ट, सड़कों का नेटवर्क, और डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के साथ-साथ माइनिंग और रक्षा यानी डिफेंस सेक्टर से जुड़े एसेट्स भी मजबूती से शामिल हैं। 6 अरब डॉलर बैठते हैं।

कंपनी द्वारा जुटाई गई इस भारी-भरकम पूंजी का मुख्य इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च को बढ़ाने और कंपनी पर लदे कर्ज को चुकाने के लिए किया जाना है। इस अहम घटनाक्रम के ठीक अगले महीने, गौतम अडानी को अमेरिका में लगे सिक्योरिटीज फ्रॉड यानी प्रतिभूति धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों से बड़ी राहत मिल गई थी। यह एक बहुत बड़ा और संवेदनशील मामला था, जिससे उनके पूरे बिजनेस ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और भविष्य पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा था और इस कानूनी राहत के बाद अडानी ग्रुप अपनी ग्रोथ और विकास को और अधिक तेज करने के लिए अब विदेशों में भी बड़ी कंपनियों के अधिग्रहण यानी एक्विजिशन पर तेजी से विचार कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर अन्य अधिग्रहण के प्रयास

मामले की अंदरूनी जानकारी रखने वाले लोगों ने यह भी खुलासा किया है कि हाल ही में अडानी ग्रुप ने यूनाइटेड किंगडम यानी यूके के सबसे बड़े पोर्ट ऑपरेटर, जिसका नाम ‘एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स’ या AB Ports है, उसमें भी हिस्सेदारी खरीदने पर गंभीर विचार किया था। 4 अरब डॉलर बैठता है। अब देखना यह है कि क्या गौतम अडानी की यह मेगा प्लानिंग VTTI के अधिग्रहण के रूप में एक ठोस और सफल परिणाम तक पहुंच पाती है या नहीं।