अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 44 lakh पर आ गई है। 46 lakh के स्तर पर था। कीमती धातुओं में यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों के बदलते रुख को दर्शाती है।
चांदी की कीमतों में भी शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखी गई और 25 lakh पर पहुंच गई है। 35 lakh प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी। पिछले 28 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका-ईरान संघर्ष के प्रभाव के कारण सोना ₹15,382 और चांदी ₹41,000 तक सस्ती हो चुकी है। बाजार में आई इस अस्थिरता ने पिछले कुछ महीनों की तेजी पर विराम लगा दिया है।
बाजार की वर्तमान दरें और दैनिक गिरावट
शुक्रवार को बाजार खुलते ही कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव देखा गया। 44 lakh प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। 25 lakh प्रति किलोग्राम रह गई है। यह गिरावट पिछले कुछ हफ्तों से जारी सुधार का हिस्सा मानी जा रही है, जहां कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
उच्चतम स्तर से कीमतों में बड़ी गिरावट
सोने और चांदी की कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे आ चुकी हैं। 44 lakh पर आ गया है। चांदी की स्थिति और भी अधिक अस्थिर रही है। 60 lakh की भारी गिरावट आई है। वर्तमान में चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 41% नीचे कारोबार कर रही है।
मध्य पूर्व संघर्ष और नकदी की प्राथमिकता
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसकी कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में निवेशकों का व्यवहार अलग देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण निवेशकों के बीच नकदी (Cash) बचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। अनिश्चितता के समय में लिक्विड मनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़े निवेशकों ने अपनी गोल्ड और सिल्वर होल्डिंग्स को बेचना शुरू कर दिया है। इसी बिकवाली के कारण बाजार में आपूर्ति बढ़ी है और कीमतों में गिरावट आई है।
मुनाफावसूली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का प्रभाव
कीमतों में गिरावट का एक मुख्य कारण बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली (Profit Booking) है। जनवरी में जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं, तब कई संस्थागत निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी हिस्सेदारी बेची। इसके अलावा, अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाए गए सख्त रुख ने भी कीमती धातुओं के आकर्षण को कम किया है और उच्च ब्याज दरों के माहौल में निवेशक अक्सर गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने से हटकर अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख करते हैं।
बाजार विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता का असर घरेलू कीमतों पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अधिकारियों और बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, वर्तमान में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और केंद्रीय बैंकों के निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में आपूर्ति की अधिकता और मांग में कमी के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
