ईरान की अमेरिकी-इजराइली सैनिकों को चेतावनी, पड़ोसी देशों को इलाका छोड़ने की सलाह

ईरान ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों पर हमलों की घोषणा की है। ईरानी सेना ने पड़ोसी देशों के नागरिकों को चेतावनी देते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले इलाकों को तुरंत छोड़ने की सलाह दी है ताकि वे संभावित सैन्य कार्रवाई की चपेट में न आएं।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी और इजराइली सैन्य बलों के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की घोषणा की है। ईरानी सेना ने एक आधिकारिक संदेश जारी कर पड़ोसी देशों के नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे उन क्षेत्रों से तुरंत हट जाएं जहां अमेरिकी सेना तैनात है। सेना के अनुसार, यह कदम नागरिकों को सैन्य संघर्ष के दौरान होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि विदेशी ताकतें निर्दोष नागरिकों को 'मानव ढाल' के रूप में उपयोग करने का प्रयास कर रही हैं क्योंकि उनमें अपने ठिकानों की रक्षा करने की क्षमता नहीं है।

ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 का क्रियान्वयन

ईरानी सेना ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के शुरू होने की पुष्टि की। इस अभियान के तहत ईरान ने पूरे क्षेत्र में फैले प्रमुख अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलों और उन्नत ड्रोनों का उपयोग किया है। आईआरजीसी के अनुसार, यह ऑपरेशन उन हमलों का जवाब है जिनमें ईरानी नागरिकों और प्रमुख सैन्य हस्तियों को निशाना बनाया गया था। सेना ने स्पष्ट किया है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य उन रणनीतिक संपत्तियों को नष्ट करना है जो ईरान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनके लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं हो जाती।

नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श और चेतावनी

प्रेस टीवी के माध्यम से जारी एक संदेश में ईरानी सेना ने पश्चिम एशिया के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास रहने से बचें। संदेश में कहा गया है कि अमेरिकी और इजराइली सेनाएं अपनी रक्षा करने में असमर्थ होने के कारण नागरिकों के बीच शरण ले रही हैं। सेना ने चेतावनी दी है कि वे इन बलों को जहां भी पाएंगे, वहां कार्रवाई करेंगे। इस स्थिति को देखते हुए, पड़ोसी देशों के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य ठिकानों वाले इलाकों को तुरंत खाली कर दें। ईरानी सेना ने इसे अपना कर्तव्य बताया है कि वे उन ताकतों को खत्म करें जो क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रही हैं।

लक्षित सैन्य ठिकानों और संपत्तियों का विवरण

ईरान द्वारा किए गए हमलों में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अशदोद में स्थित तेल डिपो और भंडारण टैंकों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। इसके अतिरिक्त, मोदियिन बस्ती में सैन्य कर्मियों के एक प्रमुख ठिकाने को नष्ट करने की बात कही गई है। ईरानी सेना ने यह भी दावा किया कि उसने अल-धफरा और अल-उदेरी में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। अली अल-सलेम एयर बेस पर परिवहन विमानों और ड्रोन के रखरखाव के लिए उपयोग किए जाने वाले हैंगर को भी निशाना बनाया गया है। इन हमलों में कई रणनीतिक संपत्तियों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

इजराइल की जवाबी कार्रवाई और यज्द पर हमला

ईरानी हमलों के जवाब में इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। आईडीएफ ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के यज्द प्रांत में स्थित एक प्रमुख सैन्य सुविधा पर हमला किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा मिसाइलों और समुद्री सुरंगों के उत्पादन के लिए ईरानी शासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र थी। इजराइली सेना ने कहा कि यह हमला ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने और भविष्य के खतरों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। आईडीएफ ने स्पष्ट किया कि वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना जारी रखेंगे।

क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव की वर्तमान स्थिति

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। एक ओर जहां अमेरिकी प्रशासन शांति बहाली के प्रयासों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान की हालिया घोषणा और 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत किए गए हमले इस बात का संकेत हैं कि सैन्य टकराव और गहरा सकता है। विभिन्न देशों के दूतावासों और सुरक्षा एजेंसियों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने के निर्देश जारी किए हैं। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।