भारतीय सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में भारी उछाल का सिलसिला जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹582 बढ़कर ₹1,59,823 के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में सोने की कीमत ₹1,59,241 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई थी। सोने की कीमतों में यह लगातार तीसरे कारोबारी दिन की बढ़त है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले तीन दिनों के भीतर ही पीली धातु के दाम में ₹5,000 का इजाफा हो चुका है।
चांदी की कीमतों में भी आज जबरदस्त तेजी देखी गई है। एक किलो चांदी की कीमत में ₹6,455 की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इसका भाव ₹2,69,367 प्रति किलो पर पहुंच गया है। कल यानी पिछले कारोबारी दिन चांदी ₹2,62,912 प्रति किलो के स्तर पर बंद हुई थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़े
IBJA के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 25 फरवरी को बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में मजबूती देखी गई। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,59,823 प्रति 10 ग्राम रहा। इस साल की शुरुआत से ही सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमतों में ₹27,000 और चांदी की कीमतों में ₹39,000 की कुल बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। 86 लाख का अपना अब तक का उच्चतम स्तर (All-Time High) छुआ था।
कीमतों में बढ़ोतरी के प्रमुख वैश्विक कारण
बाजार के जानकारों और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, सोने-चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक कारण उत्तरदायी माने जा रहे हैं। पहला कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की बड़े पैमाने पर की जा रही खरीदारी है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। दूसरा प्रमुख कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती के संकेत देना है। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो वित्तीय संपत्तियों की तुलना में सोने की मांग बढ़ जाती है। तीसरा कारण मध्य पूर्व और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं, जिसके कारण निवेशक सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वर्ष 2025 और 2026 का तुलनात्मक विवरण
वर्ष 2025 सोने और चांदी के लिए ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक लाभ देने वाला वर्ष रहा था। 33 लाख हो गया, जो लगभग 75% की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि के दौरान चांदी की कीमतों में 167% का उछाल देखा गया। 30 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी। 60 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ईटीएफ निवेश
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी यूबीएस (UBS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में निरंतर मजबूती बनी हुई है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 863 टन सोने की खरीदारी की थी। वर्ष 2026 के लिए यह अनुमान लगाया गया है कि केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी बढ़कर 950 टन तक पहुंच सकती है। इसके अतिरिक्त, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। अनुमानों के अनुसार, 2026 में गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़कर 825 टन होने की उम्मीद है, जो कीमतों को और अधिक समर्थन प्रदान कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और भविष्य के अनुमानित स्तर
यूबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें वर्ष 2026 के मध्य तक 6,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती हैं। 80 लाख प्रति 10 ग्राम तक जाने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रास्फीति के दबाव ने भी कीमती धातुओं की कीमतों को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई है और वर्तमान में बाजार की नजरें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों पर टिकी हैं।
