India-US Tariff War: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि रूसी तेल की खरीद न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक बाजारों को स्थिर करने में भी योगदान देती है। उन्होंने भारत की स्वतंत्र नीति पर जोर देते हुए कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना जारी रखेगा, भले ही अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव की स्थिति हो।
अमेरिका के आरोपों पर जयशंकर का करारा जवाब
जयशंकर ने अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए 50% टैरिफ, जिसमें 25% पेनल्टी टैरिफ शामिल है, की आलोचना की। उन्होंने कहा, "यह हास्यास्पद है कि व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहा है। अगर आपको भारत से तेल या रिफाइंड प्रोडक्ट्स खरीदने में दिक्कत है, तो मत खरीदें। कोई आपको मजबूर नहीं कर रहा। यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है। अगर आपको पसंद नहीं, तो न खरीदें।"
तेल खरीद से स्थिर हुईं कीमतें
जयशंकर ने 2022 में वैश्विक तेल कीमतों में उछाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत की रूस से तेल खरीद को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला था, क्योंकि इससे बाजारों में स्थिरता आई। उन्होंने कहा, "जब तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, तो पूरी दुनिया में चिंता थी। तब कहा गया कि भारत को रूस से तेल खरीदने देना चाहिए, क्योंकि इससे कीमतें स्थिर होंगी। हमारी खरीद का उद्देश्य बाजार को शांत करना भी है। यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों हितों में है।"
रूस के साथ बढ़ते द्विपक्षीय संबंध
19 से 21 अगस्त 2025 तक रूस दौरे पर गए जयशंकर ने मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात की। इस दौरान भारत-रूस इंटरनेशनल कमीशन ऑन ट्रेड, इकोनॉमिक, साइंटिफिक, टेक्निकल एंड कल्चरल कोऑपरेशन (IRIGC-TEC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। जयशंकर ने कहा, "हम रूस के साथ व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। मेरी यात्रा के दौरान हमने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर हमारा रुख स्पष्ट है- हम इसका जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं।"
अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता पर स्थिति स्पष्ट
अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता पर जयशंकर ने कहा कि भारत का रुख दृढ़ है। उन्होंने बताया, "बातचीत में कई सीमा रेखाएं हैं, जिनके बारे में हमें स्पष्ट होना होगा। हम अपने किसानों और छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने अमेरिका और चीन के साथ भारत के संबंधों को संतुलित बताते हुए कहा कि दोनों देशों के साथ सहयोग और विवाद दोनों रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर संबंध सकारात्मक हैं।
जयशंकर ने यह भी उल्लेख किया कि ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका ने चीन के साथ G2 फ्रेमवर्क का विचार रखा था, लेकिन ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव आया। उन्होंने कहा, "रिश्तों में कुछ मुद्दे हैं, लेकिन ऐसा नहीं कि पहले कभी मुद्दे नहीं थे। रिश्ते के अन्य पहलू मजबूत हैं।"
#WATCH | Delhi: At The Economic Times World Leaders Forum 2025, EAM Dr S Jaishankar says, "It's funny to have people who work for a pro-business American administration accusing other people of doing business. If you have a problem buying oil or refined products from India, don't… pic.twitter.com/rXW9kCcVuv
— ANI (@ANI) August 23, 2025
