राज्यसभा चुनाव: बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग

राज्यसभा चुनावों के दौरान बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिहार में तीन विधायक गायब रहे, जबकि ओडिशा और हरियाणा में पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान हुआ, जिससे आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

राज्यसभा चुनाव के हालिया नतीजों ने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, कांग्रेस के भीतर गहरे मतभेदों और अनुशासन की कमी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में मतदान के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसने न केवल पार्टी के उम्मीदवारों के समीकरणों को प्रभावित किया, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश कर दी है और इन चुनावों में पार्टी के अपने ही विधायकों ने या तो क्रॉस वोटिंग की या फिर मतदान के महत्वपूर्ण समय पर वे गायब रहे, जिससे विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है।

बिहार में तीन विधायकों की अनुपस्थिति और राजनीतिक प्रभाव

बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके तीन विधायक मतदान के दिन अनुपस्थित रहे। महागठबंधन के तहत कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह का समर्थन करने का निर्णय लिया था। हालांकि, मतदान के दिन तीन विधायकों के फोन 'अनरीचेबल' हो गए और वे सदन में उपस्थित नहीं हुए। इन विधायकों की अनुपस्थिति का सीधा लाभ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों को मिला। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 13 मार्च तक सभी विधायक संपर्क में थे, लेकिन उसके बाद अचानक स्थितियां बदल गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों को प्रलोभन देकर दूर किया गया है।

ओडिशा में क्रॉस वोटिंग और तीन विधायकों का निलंबन

ओडिशा में कांग्रेस पार्टी ने अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपने तीन विधायकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और इन विधायकों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान करने का आरोप है। निलंबित किए गए विधायकों में सनाखेमुंडी के रमेश चंद्र जेना, मोहना के दशरथी गोमांगो और बाराबती-कटक की सोफिया फिरदौस शामिल हैं। पार्टी की प्रदेश इकाई ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ विश्वासघात करने वालों के लिए संगठन में कोई स्थान नहीं है। ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) के भीतर भी क्रॉस वोटिंग की खबरें आईं, लेकिन कांग्रेस के लिए अपने ही विधायकों को एकजुट न रख पाना एक बड़ी संगठनात्मक विफलता के रूप में देखा जा रहा है।

हरियाणा में रिसॉर्ट राजनीति के बावजूद क्रॉस वोटिंग

हरियाणा में कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें शिमला और कसौली के सुरक्षित रिसॉर्ट्स में ठहराया था और इसके बावजूद, मतदान के दौरान पार्टी का गणित बिगड़ गया। रिपोर्टों के अनुसार, पांच विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार की स्थिति कमजोर हो गई। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौध ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के खिलाफ एक करीबी मुकाबले में जीत हासिल की, लेकिन यह जीत उम्मीद से बहुत कम अंतर से हुई। भाजपा के संजय भाटिया ने अपनी सीट आसानी से सुरक्षित कर ली। हरियाणा कांग्रेस अब उन विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में है जिन्होंने कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग की है।

पार्टी नेतृत्व के सामने अनुशासन की चुनौती

इन घटनाओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के राज्य प्रभारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा चुनावों में विधायकों का इस तरह से पाला बदलना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर संवाद की कमी है और विधायकों में असंतोष व्याप्त है। बिहार में राजेश राम ने कहा कि वे इस पूरे मामले की रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते इन बागियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को और भी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

भविष्य की कार्रवाई और संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट

राज्यसभा चुनाव के इन नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है और ओडिशा में की गई त्वरित कार्रवाई को एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पार्टी ने बिना किसी देरी के विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हरियाणा और बिहार में भी इसी तरह के कड़े फैसलों की उम्मीद की जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि आंतरिक अनुशासन को बहाल करना अब प्राथमिकता होनी चाहिए और चुनाव आयोग के पास भी कुछ मामलों को ले जाने की तैयारी की जा रही है, हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग के मामलों में दलबदल विरोधी कानून की सीमाएं काफी जटिल हैं।