भारत में सर्वाइकल कैंसर का बढ़ता खतरा: स्वदेशी PoC HPV टेस्ट से जगी नई उम्मीद

भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के 127000 नए मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी पॉइंट-ऑफ-केयर (PoC) HPV टेस्ट इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है और विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस खतरनाक बीमारी के तेजी से फैलने का सबसे बड़ा कारण समय पर इसकी पहचान न हो पाना है। वर्तमान में सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले टेस्ट काफी महंगे हैं, जिसके कारण आम महिलाओं तक इनकी पहुंच सीमित है। हालांकि, अब विशेषज्ञों ने स्वदेशी यानी देसी टेस्ट को लेकर बड़ी उम्मीदें जताई हैं, जो महंगे टेस्ट की तुलना में अधिक कारगर और सुलभ साबित हो सकते हैं। सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का लगातार होने वाला इंफेक्शन है, विशेष रूप से cHPV के मामलों में यह अधिक देखा गया है।

विशेषज्ञों की राय और वर्तमान चुनौतियां

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) झज्जर की प्रमुख और AIIMS नई दिल्ली के प्रसूति विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर नीरजा भाटला ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। डॉक्टर भाटला के अनुसार, HPV टेस्ट वर्तमान में सबसे सटीक जांच पद्धति है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी इसका बहुत महंगा होना है। इसके विपरीत, VIA यानी विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड टेस्ट काफी सस्ता है, लेकिन तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से इसका दायरा देश में बढ़ नहीं पा रहा है और ऐसी स्थिति में, देश को सस्ते PoC HPV टेस्ट की सख्त जरूरत है। डॉक्टर भाटला का मानना है कि अगर 35 साल और 45 साल की उम्र में महिलाओं के केवल 2 बार टेस्ट किए जाएं, तो भारत से सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

PoC टेस्टिंग पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत

डॉक्टर नीरजा भाटला ने पॉइंट-ऑफ-केयर (PoC) टेस्टिंग पर जोर दिया है। इसका अर्थ है ऐसा टेस्ट जो मरीज के पास ही किया जा सके और जिसका परिणाम तुरंत मिल जाए। इसमें सैंपल को किसी बड़ी लैब में भेजने या रिपोर्ट के लिए हफ्तों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती। यदि भारत में सस्ता, आसान और भरोसेमंद PoC HPV टेस्ट उपलब्ध हो जाए, तो आशा दीदी या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर पर ही महिलाओं की जांच की जा सकती है। इससे स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ेगा और 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण स्टडी भी की जा रही है।

स्वदेशी टेस्ट और वैश्विक मानक

यह स्टडी भारत में विकसित किए जा रहे HPV टेस्ट्स का मूल्यांकन करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल (TPP) और IARC के मानदंडों को लागू करने वाली शुरुआती स्टडीज में से एक है और इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे HPV टेस्ट विकसित करना है जो सर्वाइकल कैंसर में पाए जाने वाले 8 सबसे आम HPV प्रकारों का पता लगा सकें। इन टेस्ट्स को जिला और उप-जिला स्तर की सुविधाओं में आसानी से किया जा सकेगा और इनके लिए बहुत कम ट्रेनिंग की जरूरत होगी। डॉक्टर भाटला ने बताया कि इन नवाचारों का मकसद मौजूदा टेस्ट्स की कमियों को दूर करना है, क्योंकि वे ज्यादातर अमीर देशों में विकसित किए गए थे और बहुत जटिल थे। यह स्टडी दिखाती है कि भारतीय प्लेटफॉर्म भी ग्लोबल गोल्ड-स्टैंडर्ड टेस्ट्स के बराबर सटीकता और गुणवत्ता हासिल कर सकते हैं।

भारत में बीमारी की भयावहता

भारत में सर्वाइकल कैंसर की समस्या कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। डॉक्टर नीरजा के अनुसार, देश में हर साल लगभग 127000 नए मामले सामने आते हैं और इनमें से करीब 80000 महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है। वर्तमान में 30 साल से ऊपर की महिलाओं को हर 3 से 5 साल में जांच कराने की सलाह दी जाती है ताकि कैंसर की शुरुआती स्टेज का पता लगाया जा सके। सरकार के नेशनल प्रोग्राम में ब्रेस्ट, ओरल और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शामिल है, जिसमें सर्वाइकल के लिए VIA टेस्ट किया जाता है। हालांकि, पहुंच की कमी के कारण स्क्रीनिंग का कवरेज अभी भी बहुत कम है।

WHO की सिफारिशें और भविष्य की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का भी मानना है कि सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए HPV टेस्टिंग सबसे बेहतर तरीका है। WHO के अनुसार, यदि अच्छी गुणवत्ता वाला HPV टेस्ट उपलब्ध हो, तो जीवन में केवल 2 बार की जांच (35 और 45 साल की उम्र में) ही पर्याप्त है। समस्या यह है कि वर्तमान में उपलब्ध ज्यादातर HPV टेस्ट बहुत महंगे हैं और उनके लिए बड़ी मशीनों और उन्नत तकनीक की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्रों और अंतिम छोर तक की सुविधाओं (Last Mile Facilities) में ये टेस्ट उपलब्ध नहीं हैं, जिसे स्वदेशी PoC टेस्ट के जरिए बदला जा सकता है।