भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर बड़ी बढ़त दर्ज की गई है और 12 अरब के स्तर पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पिछले सप्ताह आई भारी गिरावट के बाद इस रिकवरी ने भारतीय बाजार को बड़ी राहत प्रदान की है।
विदेशी मुद्रा संपत्ति और स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस कुल वृद्धि में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) और स्वर्ण भंडार का प्रमुख योगदान रहा है। 78 अरब की बढ़त देखी गई। विदेशी मुद्रा संपत्ति में यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है और 78 अरब की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल भंडार की स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई है।
SDR और IMF के साथ भारत की स्थिति
विशेष आहरण अधिकार (SDR) के मोर्चे पर भी भारत की स्थिति में सुधार हुआ है और 707 अरब के स्तर पर पहुंच गया है। 816 अरब पर स्थिर बनी हुई है। ये घटक देश की अंतरराष्ट्रीय तरलता और वैश्विक व्यापारिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की क्षमता को दर्शाते हैं।
पिछले सप्ताह की गिरावट से उबरता विदेशी मुद्रा भंडार
यह ताजा वृद्धि पिछले सप्ताह की उस बड़ी गिरावट के बाद आई है जिसने बाजार की चिंताएं बढ़ा दी थीं। 05 अरब पर आ गया था। वह लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट थी, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता को माना गया था। 12 अरब का स्तर भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
वैश्विक तनाव और रुपये की स्थिरता पर प्रभाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से ईरान और अमेरिका के बीच की स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रा बाजारों को प्रभावित किया है। इस तनाव के कारण भारतीय रुपये पर भी दबाव देखा गया था। अधिकारियों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। केंद्रीय बैंक द्वारा डॉलर की बिक्री और अन्य नीतिगत उपायों के माध्यम से रुपये को स्थिर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। 49 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन वर्तमान रिकवरी वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
