India-US Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार और व्हाइट हाउस के व्यापार विशेषज्ञ पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया है। रविवार (स्थानीय समयानुसार) को सीएनबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में नवारो ने भारत के उच्च टैरिफ, रूस से तेल खरीदने की नीति और चीन के साथ उसके संबंधों की कड़ी आलोचना की। उनका दावा है कि भारत अब व्यापारिक बातचीत की मेज पर आ रहा है, लेकिन अमेरिका को भारत की 'व्यापार बाधाओं' से निपटना पड़ेगा। यह बयान तब आया है जब भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की वार्ताएं फिर से शुरू होने की कगार पर हैं।
नवारो, जो ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों के प्रमुख सूत्रधार माने जाते हैं, ने भारत को 'टैरिफ का महाराजा' करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत के टैरिफ किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था से कहीं अधिक हैं, जो अमेरिकी निर्यातकों और श्रमिकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सीएनबीसी इंटरनेशनल को दिए इंटरव्यू में नवारो ने कहा, "भारत बातचीत की मेज पर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत ही सौहार्दपूर्ण, अच्छा और रचनात्मक ट्वीट किया और राष्ट्रपति ट्रंप ने उसका जवाब दिया। देखते हैं यह कैसे काम करता है। दोनों देश अभी भी व्यापार के मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं और 'व्यापार बाधाओं' पर काम कर रहे हैं। लेकिन व्यावहारिक रूप से, हम जानते हैं कि व्यापार के मोर्चे पर, उनके टैरिफ किसी भी बड़े देश की तुलना में सबसे ज़्यादा हैं। उनके गैर-टैरिफ अवरोध बहुत ऊंचे हैं। हमें इससे निपटना पड़ा, जैसे हम हर दूसरे देश के साथ निपट रहे हैं।"
यह नवारो का भारत पर तीसरा लगातार हमला है। अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए थे, जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने के लिए था। इससे भारत के निर्यात-निर्भर उद्योगों पर गहरा असर पड़ा है, खासकर कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेक्टर में। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत का माल व्यापार घाटा कम हुआ था, लेकिन अमेरिकी टैरिफ ने निर्यात पर छाया डाल दी है।
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका का अचानक रुख: 'डाकुओं जैसा व्यवहार'
नवारो ने भारत द्वारा 2022 के बाद रूस से तेल आयात को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के तुरंत बाद भारतीय रिफाइनर रूसी रिफाइनरों के साथ 'साठगांठ' में लग गए, जो 'डाकुओं की तरह' व्यवहार कर रहे हैं। नवारो ने कहा, "भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने का मुद्दा भी है, जो उसने कभी नहीं किया। आप इसे समझते हैं। उसने 2022 से पहले ऐसा कभी नहीं किया। मेरा मतलब है, आक्रमण के तुरंत बाद भारतीय रिफ़ाइनर रूसी रिफ़ाइनरों के साथ मिल गए, और वे डाकुओं की तरह काम कर रहे हैं। मेरा मतलब है, यह पागलपन जैसा है क्योंकि वे अनुचित व्यापार में हमसे पैसा कमाते हैं। उन्होंने कहा, 'ठीक है, तो अमेरिकी कामगारों को परेशानी होगी, है ना?'"
यह मुद्दा 2022 से ही विवादास्पद रहा है। बाइडेन प्रशासन ने रूसी तेल पर $60 प्रति बैरल कीमत सीमा लगाई थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे और सख्त कर दिया। भारत ने हमेशा तर्क दिया है कि वह रूस से सस्ता तेल खरीदकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, खासकर वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच। हालांकि, नवारो का कहना है कि यह पैसे का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा, "फिर वे उस पैसे का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए करते हैं, और फिर रूसी उससे हथियार खरीदते हैं। और फिर हमें, करदाताओं के रूप में, इसके लिए, यूक्रेन की रक्षा के लिए, और अधिक भुगतान करना पड़ता है। ऐसा कैसे हो सकता है?"
पिछले हफ्ते ही नवारो ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करके भारत को 'क्रेमलिन का लॉन्ड्रोमैट' कहा था, जिसकी फैक्ट-चेकिंग हुई। उन्होंने दावा किया कि भारत रूसी तेल से 'लाभ कमाकर' युद्ध मशीन को फंड कर रहा है, जिससे यूक्रेनियन और रूसी सैनिक मर रहे हैं।
चीन और रूस के साथ 'गठजोड़': मोदी की विदेश नीति पर सवाल
नवारो ने भारत-चीन संबंधों पर भी चुटकी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चीन के साथ एक मंच साझा करने की आलोचना की, जो भारत के लिए 'दीर्घकालिक अस्तित्व का खतरा' है। कहा, "मोदी को चीन के साथ एक मंच पर देखना, जो उसके लिए दीर्घकालिक अस्तित्व का ख़तरा रहा है। और पुतिन के साथ भी, यह एक दिलचस्प दौर था। मुझे नहीं लगता कि उन्हें ऐसा करने में सहजता महसूस हुई।"
यह टिप्पणी हाल ही में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के संदर्भ में आई, जहां मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। नवारो ने भारत को 'अहंकारी' बताया और कहा कि भारत अपनी संप्रभुता का हवाला देकर उच्च टैरिफ को जायज ठहराता है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: क्या होगा अगला कदम?
नवारो के बयान के ठीक पहले, अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा था कि भारत 1.4 अरब आबादी होने के बावजूद अमेरिकी मकई का एक दाना भी नहीं खरीदता। उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ कम न करने पर भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में 'कठिन समय' आएगा।
भारत-अमेरिका के बीच छठी दौर की बीटीए वार्ता अगस्त में टल गई थी, लेकिन अब अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच की दिल्ली यात्रा तय है। भारत ने टैरिफ को 'अनुचित और असंगत' बताया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह रूस को अलग-थलग करने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवारो के बयान ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा हैं, जो चीन के बाद भारत को भी निशाने पर ले रही है। हालांकि, दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग मजबूत है, लेकिन व्यापार विवाद बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में वार्ता का परिणाम तय करेगा कि क्या भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत होंगे या तनाव बढ़ेगा।
