पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट की गहरी आशंकाओं के बीच कतर से 20 हजार टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर आया एक जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पुष्टि की। वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों के कारण समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच इस खेप का भारत पहुंचना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। यह आपूर्ति ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्टेट जैसे संवेदनशील रास्तों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में चिंता बनी हुई है।
एमवी सिमी की सुरक्षित यात्रा और समय
मार्शल आइलैंड के झंडे वाला जहाज एमवी सिमी कतर से अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था। इस जहाज में 20 हजार टन एलपीजी लदी हुई थी। इस जहाज ने 13 मई को सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील होर्मुज स्टेट को पार किया और शनिवार रात करीब 11 बजकर 30 मिनट पर कांडला बंदरगाह पर लंगर डाला। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों पर जोखिम काफी बढ़ गया है, इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की निरंतर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद जहाज का समय पर पहुंचना भारतीय ऊर्जा प्रबंधन की मजबूती को दर्शाता है।
होर्मुज स्टेट का सामरिक महत्व और चुनौतियां
ओमान के तट के पास स्थित होर्मुज स्टेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है और इसके जवाब में शुरू हुई सैन्य कार्रवाइयों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। भारत के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से ही पूरा करता है। इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर देश में तेल और गैस की कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है।
भारतीय जहाजों की आवाजाही के आंकड़े
अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मार्च की शुरुआत से अब तक कुल 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज स्टेट को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। इन जहाजों में 12 एलपीजी टैंकर और एक कच्चा तेल लेकर जाने वाला जहाज शामिल है। यह आंकड़े बताते हैं कि जोखिम के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस मार्ग का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहा है। हालांकि, सुरक्षा की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इसी कड़ी में 13 मई को ओमान तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले कारोबारी जहाज पर हमला भी हुआ था। उस समय ओमान के अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए जहाज पर मौजूद सभी 14 चालक दल सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया था, हालांकि उस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख
समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों को लेकर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी आवाज उठाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना और चालक दल की सुरक्षा को खतरे में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। भारत का मानना है कि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए।
