Retail Inflation In August / अगस्त में इतनी बढ़ गई महंगाई, खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर

भारत की खुदरा महंगाई जुलाई के 1.55% से बढ़कर अगस्त में 2.07% हो गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हाई बेस इफेक्ट के कमजोर पड़ने और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी के कारण यह वृद्धि हुई। सब्जियों, मांस, मछली, तेल, अंडे और पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतों में उछाल ने महंगाई को बढ़ाया। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 1.69% और शहरी क्षेत्रों में 2.47% रही।

Retail Inflation In August: भारत की खुदरा महंगाई अगस्त महीने में हल्की बढ़ोतरी के साथ 2.07% पर पहुंच गई, जो जुलाई में आठ साल के निचले स्तर 1.55% पर थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बेस इफेक्ट के कमजोर पड़ने और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी के कारण हुई है। जुलाई तक बेस इफेक्ट ने महंगाई को ऐतिहासिक रूप से नीचे बनाए रखा था, लेकिन अगस्त में इसके असर के कम होने से रुझान बदल गया।

विशेषज्ञों के अनुमान भी इसी ओर इशारा कर रहे थे। रॉयटर्स के सर्वे में शामिल 40 अर्थशास्त्रियों ने अगस्त के लिए 2.10% की महंगाई दर का अनुमान जताया था। यह लगातार सातवां महीना है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।

क्यों बढ़ी महंगाई?

सब्जियों, मांस-मछली, तेल, अंडे और पर्सनल केयर आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई का मुख्य कारण रही। ये रोजमर्रा की जरूरतें सीधे तौर पर घर-गृहस्थी के खर्च को प्रभावित करती हैं। सब्जियों और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ने से परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।

ग्रामीण बनाम शहरी असर

ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर जुलाई के 1.18% से बढ़कर अगस्त में 1.69% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 2.10% से चढ़कर 2.47% तक पहुंच गई। खाद्य महंगाई ग्रामीण इलाकों में -0.70% और शहरी क्षेत्रों में -0.58% दर्ज की गई।

अन्य क्षेत्रों की स्थिति

  • आवास महंगाई: घटकर 3.09%

  • शिक्षा महंगाई: 3.60%

  • स्वास्थ्य महंगाई: 4.40%

  • फ्यूल और लाइट: 2.43% पर घटी

  • परिवहन और संचार: खर्चों में भी कमी

कुल मिलाकर, अगस्त की महंगाई यह संकेत देती है कि भले ही यह RBI के लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है, लेकिन खाद्य कीमतों की अस्थिरता आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की जेब और मौद्रिक नीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।

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