ईरान ने ट्रंप को दिखाया आईना: 2029 तक बातचीत से इनकार और होर्मुज बंद

ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंत यानी 2029 तक अमेरिका से किसी भी बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखने का फैसला किया है और 300 अरब डॉलर के मुआवजे सहित तीन बड़ी शर्तें रखी हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। तेहरान ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत नहीं करेगा। ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह साल 2029 तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोलेगा, जब तक कि डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता। वाशिंगटन की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन ईरान ने झुकने के बजाय अपनी शर्तों को और कड़ा कर दिया है। तेहरान ने अपनी तीन पुरानी शर्तों को एक बार फिर दोहराते हुए अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।

2029 तक ट्रंप से कोई समझौता नहीं

ईरानी मीडिया और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के सलाहकार माजिद शेकरी द्वारा जारी किए गए बयानों के अनुसार, तेहरान ने अब ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक अपनी मौजूदा रणनीति को जारी रखने का फैसला किया है और ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल 20 जनवरी 2029 को समाप्त होगा और ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह तब तक इंतजार करने के लिए तैयार है। माजिद शाकेरी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में तेहरान का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ट्रंप उनके साथ किसी भी तरह के समझौते तक नहीं पहुंच पाएंगे और उन्होंने कहा कि ईरान की रणनीति न तो सीधी जंग की है और न ही तत्काल किसी समझौते की, बल्कि वह एक ऐसी स्थिति बनाए रखना चाहता है जिसमें युद्ध भी न हो और पूरी तरह शांति भी स्थापित न हो। ईरान का मानना है कि इस अनिश्चितता और रणनीतिक धैर्य के माहौल में ही उसकी जीत छिपी है।

ईरान की तीन बड़ी और कड़ी शर्तें

ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य की बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं और इन शर्तों में सबसे प्रमुख मांग करीब 300 अरब डॉलर के मुआवजे की है। तेहरान का दावा है कि यह राशि युद्ध के दौरान हुए नुकसान और पिछले समझौतों के कथित उल्लंघन की भरपाई के लिए आवश्यक है। दूसरी शर्त के रूप में ईरान ने अपनी उन सभी संपत्तियों की रिहाई की मांग की है जिन्हें अमेरिका ने जब्त कर रखा है। तीसरी और महत्वपूर्ण शर्त क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की पूर्ण वापसी है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका इन मांगों को स्वीकार नहीं करता, तब तक बातचीत की मेज पर बैठना संभव नहीं होगा और तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के फैसले को भी इन्हीं मांगों की स्वीकृति से जोड़ दिया है।

बातचीत के बजाय संदेशों का आदान-प्रदान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। अरागची के अनुसार, कुछ देश दोनों पक्षों के बीच फिर से संवाद शुरू कराने के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान का रुख अडिग है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका समझौते के उल्लंघन को रोकने और नुकसान की भरपाई के लिए तैयार नहीं होता, तब तक किसी भी औपचारिक बातचीत की शुरुआत नहीं की जाएगी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक रूप से किसी भी बातचीत की पुष्टि करना इस समय रणनीतिक रूप से गलत होगा।

रणनीतिक युद्ध का मैदान बना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना रुख और भी सख्त कर लिया है। गार्ड्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा है कि जब तक अमेरिका ईरान की सभी शर्तें स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक यह समुद्री मार्ग बंद रहेगा। उन्होंने इसे अब सिर्फ एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि युद्ध का मैदान करार दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ है। दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी मार्ग का उपयोग करके अपने टैंकरों को एशिया, यूरोप और अमेरिका भेजते हैं और इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।