पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है। इस कूटनीतिक नाकामी का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है। विवाद का मुख्य केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर बना हुआ है। इस वार्ता की विफलता के तुरंत बाद ईरान ने एक बड़ा व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मच गई है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नया आर्थिक प्रतिबंध
शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है। ईरानी संसद के उप-अध्यक्ष हाजी बाबाई के अनुसार, यह जलडमरूमध्य अब पूरी तरह से ईरान के अधिकार क्षेत्र में है। ईरान ने फैसला किया है कि अब इस रास्ते से प्रतिदिन केवल 10 वाणिज्यिक जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ईरान ने यहां से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज पर $2 मिलियन (लगभग ₹19 करोड़) की भारी-भरकम फीस निर्धारित कर दी है। जहाजों की सीमित संख्या और इतनी बड़ी राशि के कारण वैश्विक बाजार में माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि होने की संभावना है।
इस्लामाबाद शांति वार्ता की विफलता के मुख्य कारण
इस कूटनीतिक गतिरोध के पीछे दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई बताई जा रही है और वार्ता विफल होने के बाद ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह विफल रहा। गालिबाफ के अनुसार, ईरान सकारात्मक इरादे के साथ बातचीत में शामिल हुआ था, लेकिन पिछले अनुभवों और मौजूदा परिस्थितियों के कारण अमेरिका पर विश्वास करना मुश्किल हो गया है और इसी भरोसे की कमी के कारण युद्धविराम और शांति समझौते की उम्मीदें धराशायी हो गईं।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराता गंभीर संकट
ईरान के इस एकतरफा फैसले से वैश्विक व्यापारिक समुदाय और अरब देशों में चिंता व्याप्त है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी (ADNOC) के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने ईरान के इन दावों पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज मार्ग पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं हो सकता। अल जाबेर के अनुसार, इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में किसी भी प्रकार की रुकावट का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा। इससे न केवल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि आवश्यक वस्तुओं और स्वास्थ्य सेवाओं की सप्लाई चेन पर भी गहरा संकट आ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और व्यापारिक प्रभाव
ईरान द्वारा लगाए गए इस नए 'टोल टैक्स' का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, $2 मिलियन प्रति जहाज की फीस वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकती है। यूएई और अन्य खाड़ी देशों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस तरह के बड़े झटके को सहने की स्थिति में नहीं है और इस तरह के प्रतिबंधों को रोकना अंतरराष्ट्रीय हित में अनिवार्य है।
