ईरान का ट्रंप पर पलटवार: राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- हमें वेनेजुएला बनाने का सपना टूटा

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ ईरान की एकजुटता की प्रशंसा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने वेनेजुएला बनने के बजाय एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरकर दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य पर दावों को भी खारिज किया गया।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ जारी निरंतर संघर्ष के बीच ईरानी जनता के साहस और शक्ति की जमकर सराहना की है। गवर्नमेंट वीक की शुरुआत के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को ईरान में वेनेजुएला जैसे विनाशकारी परिणामों की उम्मीद थी, लेकिन ईरान ने इन हमलों का पूरी बहादुरी और दृढ़ता के साथ सामना किया। पेजेशकियन ने कहा कि ईरानी लोगों की इस हिम्मत ने देश को एक ऐसी ताकत के रूप में स्थापित किया है जिसने अपनी एकजुटता और प्रतिरोध से पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया है। उनके अनुसार, ईरानी जनता ने कुछ ऐसा हासिल किया है जो वास्तव में कमाल का है और यह उनकी राष्ट्रीय एकता का ही परिणाम है।

आर्थिक युद्ध और प्रतिबंधों का सामना

ईरानी राष्ट्रपति के इस भाषण को रविवार को ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी द्वारा साझा किया गया। पेजेशकियन ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका का इरादा ईरान को दूसरा वेनेजुएला बनाने का था, लेकिन इसके विपरीत ईरान एक मजबूत शक्ति बनकर उभरा। इसी संदर्भ में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। बघाई ने कहा कि युद्ध और प्रतिबंध ईरान के लिए कोई अनोखी बात नहीं हैं। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि ईरान पिछले 2 दशकों से अधिक समय से विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, इसलिए देश के लिए यह कोई नई चुनौती नहीं है और वे इसके अभ्यस्त हो चुके हैं।

एकजुटता और नेतृत्व पर जोर

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने देशवासियों से एकजुटता की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि दुश्मन द्वारा थोपे गए पूर्ण आर्थिक युद्ध के सामने सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ हुए पिछले संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उस समय एक-दूसरे का साथ दिया गया था, वैसी ही हमदर्दी और एकता की जरूरत आज भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर देश समझदारी से काम लेता है और अपने नेतृत्व के दिखाए रास्ते पर चलता है, तो दुनिया की कोई भी ताकत ईरान को हार मानने या लाचार होने पर मजबूर नहीं कर सकती और यह बयान पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनावपूर्ण स्थितियों के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता विवाद

इस बीच, वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद पोस्ट साझा की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक इमेज शेयर की जिसमें रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को न्यू यूएस टेरिटरी यानी नया अमेरिकी क्षेत्र बताया गया है। इससे पहले 18 अगस्त को भी ट्रंप ने इसी तरह का एक ग्राफिक साझा किया था। 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में एक पुलिस एकेडमी की बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह बहुत जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का इलाका घोषित कर देंगे। ईरान ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद रहेगा।

ईरान का कड़ा पलटवार और 7000 मील की दूरी

अमेरिका के इन क्षेत्रीय दावों को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसन रेजाई ने सिरे से खारिज कर दिया है। रेजाई ने ट्रंप के बयानों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका की होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में नाकामी और उस पर मालिकाना हक जताने के बीच का अंतर वाशिंगटन और इस जलमार्ग के बीच की 7000 मील की दूरी से भी कहीं अधिक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिका के बाद वाले नए वैश्विक क्रम में आपका स्वागत है और यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका तेहरान के खिलाफ और अधिक कड़े आर्थिक कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे दोनों देशों के बीच वित्तीय टकराव और गहराने की आशंका है।

वैश्विक व्यापार और चीन पर प्रभाव

ईरान ने अमेरिका द्वारा भविष्य में उठाए जाने वाले दंडात्मक कदमों की कड़ी निंदा की है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि इन प्रतिबंधों से न केवल उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि इसके गंभीर परिणाम उसके प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर भी पड़ सकते हैं। विशेष रूप से चीन पर इसका असर पड़ने की संभावना है, जो ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है। ईरान का मानना है कि अमेरिका के ये कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों को अस्थिर करने की एक कोशिश हैं, लेकिन ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी नीतियों में किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।