ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता और इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण अंतिम समय में बैठक रद्द हो गई और अब नए सिरे से बैठक को लेकर चर्चा जारी है और कहा जा रहा है कि यह बैठक इस्लामाबाद से कहीं और भी स्थानांतरित की जा सकती है। यह स्थिति पाकिस्तान और विशेष रूप से वहां के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका मानी जा रही है।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रयासों को लगा झटका
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरान और अमेरिका के बीच इस शांति समझौते को सफल बनाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कमान संभाली थी। मुनीर ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए काफी मान-मनौव्वल की और खुद तेहरान का दौरा किया था। वह 48 घंटे तक तेहरान में रुके रहे ताकि ईरान को इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक के लिए राजी किया जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर समझौता करना था। हालांकि, मुनीर के इन तमाम प्रयासों के बावजूद ईरान ने इस्लामाबाद पर भरोसा नहीं जताया और बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।
ईरान के अविश्वास के तीन प्रमुख कारण
ईरान द्वारा पाकिस्तान पर भरोसा न करने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण सामने आए हैं, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
मुनीर की कूटनीति और अमेरिका के साथ संपर्क
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर ने इस वार्ता को सफल बनाने के लिए अपारंपरिक तरीके अपनाए थे और वह खुद सेना की वर्दी में तेहरान गए थे और वहां से लौटने के बाद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को फीडबैक भी दिया था। मुनीर लगातार अमेरिका के संपर्क में बने हुए थे और अमेरिका को उम्मीद थी कि इसी हफ्ते डील फाइनल हो जाएगी। हालांकि, आखिरी वक्त में ईरान के पीछे हटने से मुनीर की डिप्लोमेसी को गहरा धक्का लगा है। डॉन अखबार के अनुसार, इस्लामाबाद को अब भी वार्ता की उम्मीद है, लेकिन ईरान की ओर से फिलहाल कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
