ईरान संघर्ष: अमेरिका की 'Naughty and Nice' लिस्ट, NATO सहयोगियों पर गिरेगी गाज

अमेरिका ने ईरान संघर्ष में साथ न देने वाले NATO देशों की 'Naughty and Nice' सूची तैयार की है। ट्रंप प्रशासन इन देशों के रक्षा योगदान का मूल्यांकन कर उन्हें दंडित कर सकता है।

ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका अपने कई नाटो (NATO) सहयोगियों के रुख से असंतुष्ट नजर आ रहा है। अमेरिकी डिजिटल समाचार पत्र कंपनी 'पॉलिटिको' की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने कथित तौर पर नाटो सदस्य देशों की एक 'शरारती और अच्छे' (Naughty and Nice) की सूची तैयार की है और यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत उन देशों का मूल्यांकन किया जाएगा जिन्होंने ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका के रुख का समर्थन नहीं किया था।

सूची तैयार करने का मुख्य उद्देश्य और मूल्यांकन

पॉलिटिको ने मामले से परिचित अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया है कि इस सूची का प्राथमिक उद्देश्य उन सहयोगियों की पहचान करना है जो रणनीतिक समर्थन में पीछे रहे हैं। इस पहल के माध्यम से उन देशों को संभवतः दंडित भी किया जा सकता है जिन्होंने संकट के समय अमेरिका का साथ नहीं दिया। यह सूची सदस्य देशों को उनके रक्षा योगदान और व्यापक सहयोग के आधार पर वर्गीकृत करती है।

मार्क रुटे की यात्रा और पहल की शुरुआत

रिपोर्ट में तीन यूरोपीय राजनयिकों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से जानकारी दी गई है कि इस 'Naughty and Nice' सूची पर काम नाटो महासचिव मार्क रुटे की वाशिंगटन यात्रा से पहले ही शुरू कर दिया गया था और यह दर्शाता है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही गंभीर था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि जो सहयोगी रक्षा खर्च में अपनी हिस्सेदारी या रणनीतिक समर्थन में अमेरिका की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का कड़ा रुख

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस दृष्टिकोण को लेकर पहले ही स्पष्ट संकेत दे दिए थे। उन्होंने उन देशों की सराहना की है जो अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े हैं।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और व्हाइट हाउस का बयान

व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने प्रशासन के इस सख्त रुख की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान कई सहयोगियों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। केली के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विचार स्पष्ट कर दिए हैं और अमेरिका इस बात को याद रखेगा कि संकट के समय कौन उसके साथ था। हालांकि, अमेरिका के कुछ पूर्व अधिकारियों ने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच यूरोप के साथ बढ़ते तनाव पर ट्रंप प्रशासन की क्षमता को लेकर सवाल भी उठाए हैं।