जयपुर में चलती लो फ्लोर बस में लगी भीषण आग यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

जयपुर में कालवाड़ से चांदपोल जा रही जेसीटीएसएल की लो-फ्लोर बस के इंजन में अचानक आग लग गई। यात्रियों ने समय रहते बस से उतरकर अपनी जान बचाई, जबकि बस में रखा अग्निशमन यंत्र खाली पाया गया।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) की एक चलती हुई लो-फ्लोर बस में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना रूट संख्या 24 पर हुई, जब बस कालवाड़ से चांदपोल की ओर जा रही थी। बस संख्या RJ14PD 8538 के इंजन से अचानक आग की लपटें और धुआं उठते देख यात्रियों में हड़कंप मच गया।

यात्रियों में मची अफरा-तफरी और सुरक्षित बचाव

जैसे ही बस के इंजन से धुआं निकलना शुरू हुआ, बस में सवार यात्री बुरी तरह घबरा गए। आग की लपटें तेज होते ही यात्रियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। चालक ने तुरंत बस रोकी और सभी यात्री आनन-फानन में बस से नीचे उतरे और गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी भी यात्री को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा और सभी ने समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर अपनी जान बचाई। हालांकि, इस घटना ने शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख दी है।

सुरक्षा उपकरणों की विफलता और टैंकर की मदद

हादसे के दौरान जेसीटीएसएल की लापरवाही का एक बड़ा प्रमाण तब सामने आया जब आग बुझाने की कोशिश की गई और बस में रखा अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) पूरी तरह से खाली पाया गया। आपातकालीन स्थिति में इस यंत्र के काम न करने से स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। सौभाग्य से, उसी समय वहां से एक पानी का टैंकर गुजर रहा था। लोगों ने टैंकर को रुकवाया और उसके पानी की मदद से बस के इंजन में लगी आग पर काबू पाया गया। यदि समय पर टैंकर नहीं मिलता, तो आग पूरी बस को अपनी चपेट में ले सकती थी और एक बड़ा हादसा हो सकता था।

रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस घटना के बाद जेसीटीएसएल की बसों के रखरखाव को लेकर एम्पलाइज यूनियन एटा (AETA) ने कड़ा विरोध जताया है। यूनियन के संगठन सचिव विपिन ने बताया कि टोडी डिपो से संचालित होने वाली इन बसों के रखरखाव का जिम्मा मातेश्वरी कंपनी के पास है और आरोप है कि बसों की मरम्मत और जांच की प्रक्रिया केवल कागजों तक ही सीमित है। जमीनी स्तर पर बसों की तकनीकी स्थिति की कोई ठोस जांच नहीं की जा रही है, जिसके कारण इस तरह के तकनीकी फॉल्ट सामने आ रहे हैं और खाली फायर एक्सटिंग्विशर का मिलना इस लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है।

नियमों की अनदेखी और भविष्य का खतरा

जांच में यह भी सामने आया है कि आग का शिकार हुई यह मिनी बस अपनी निर्धारित संचालन अवधि मार्च के महीने में ही पूरी कर चुकी थी। इसके बावजूद, जेसीटीएसएल प्रबंधन ने कथित तौर पर इसकी संचालन अवधि को 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया था। आरोप है कि इस अवधि को बढ़ाने से पहले बस की कोई गहन तकनीकी जांच नहीं की गई। इसके अलावा, यह जानकारी भी मिली है कि आगामी 50 डबल डेकर बसों के रखरखाव का काम भी इसी कंपनी को सौंपा गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पुरानी और कंडम हो चुकी बसों को बिना जांच के सड़कों पर उतारा जा रहा है, तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।