भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद एस जयशंकर और मार्को रूबियो की मुलाकात

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वाशिंगटन में अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो से मुलाकात की। यह बैठक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद हुई है, जिसमें अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के तत्काल बाद हुई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करना था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की।

व्यापार समझौते और टैरिफ में कटौती की पृष्ठभूमि

इस कूटनीतिक मुलाकात की पृष्ठभूमि में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए व्यापारिक शुल्कों में की गई बड़ी कटौती है। मंगलवार को अमेरिकी प्रशासन ने भारत से आने वाली वस्तुओं पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाकर 18% करने का निर्णय लिया था। विश्लेषकों के अनुसार, पिछले छह महीनों से दोनों देशों के बीच व्यापारिक मोर्चे पर जो तनाव बना हुआ था, इस निर्णय के बाद उसमें महत्वपूर्ण कमी आने की संभावना है और मार्को रूबियो ने इस समझौते की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खोलने वाला कदम बताया है।

महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित वार्ता

बैठक के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की खोज, खनन और प्रसंस्करण पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वार्ता में ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे विषयों को शामिल किया गया। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की बैठकें जल्द आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह सहयोग विशेष रूप से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

500 बिलियन डॉलर की खरीद और तेल आयात पर नीति

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस समझौते के व्यापक आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डाला है। उनके बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी ऊर्जा, परिवहन और कृषि उत्पादों की 500 बिलियन डॉलर की खरीद के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इसके अतिरिक्त, समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद को कम करने और अमेरिकी तथा संभावित रूप से वेनेजुएला के तेल की ओर रुख करने का संकेत दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में परिभाषित किया है।

क्वाड और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग

द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा, दोनों नेताओं ने क्वाड (QUAD) के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, रूबियो और जयशंकर ने एक समृद्ध और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को स्वीकार किया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी न केवल द्विपक्षीय लाभ के लिए है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण और भविष्य की दिशा

राजनयिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ट्रंप प्रशासन के तहत भारत-अमेरिका संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है। टैरिफ में कमी और बड़े पैमाने पर व्यापारिक प्रतिबद्धताएं यह दर्शाती हैं कि दोनों देश आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा आयात के स्रोतों में बदलाव और महत्वपूर्ण खनिजों पर साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रणनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगी।

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