जापान की सना ताकाइची सरकार ने देश की सुरक्षा और प्रशासनिक निरंतरता को ध्यान में रखते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने टोक्यो के विकल्प के रूप में एक दूसरी राजधानी विकसित करने के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि जापान की सरकार वर्ष 2010 से ही इस दिशा में तैयारी कर रही थी। वर्तमान राजधानी टोक्यो को वर्ष 1868 में जापान की राजधानी के रूप में मान्यता दी गई थी, लेकिन अब बदलती भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम ने सरकार को इस ऐतिहासिक कदम की ओर धकेला है।
टोक्यो पर मंडराता भूकंप का बड़ा खतरा
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सरकार के हवाले से बताया गया है कि आने वाले 30 वर्षों में टोक्यो को भीषण भूकंप का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस अवधि के दौरान यहां 7 तीव्रता का भूकंप आने की 70 प्रतिशत संभावना है। टोक्यो की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है क्योंकि यह शहर सक्रिय फॉल्ट लाइनों के ठीक ऊपर स्थित है। इसके अलावा, टोक्यो के आसपास 4 प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, जिनमें पेसिफिक प्लेट, फिलिपीन प्लेट, यूरेशियन प्लेट और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट शामिल हैं। इन प्लेटों की आपसी हलचल टोक्यो के लिए एक निरंतर खतरा बनी हुई है, जिससे निपटने के लिए बैकअप राजधानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
संसाधनों और जनसंख्या का अत्यधिक केंद्रीकरण
सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण टोक्यो में संसाधनों का अत्यधिक जमावड़ा भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जापान की कुल आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले टोक्यो में निवास करता है। इसके अलावा, जापान की अधिकांश सूचीबद्ध कंपनियों के मुख्यालय भी इसी शहर में स्थित हैं। रोजगार के सबसे बड़े अवसर भी यहीं केंद्रित हैं। ऐसी स्थिति में, यदि टोक्यो में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तो न केवल जान-माल का भारी नुकसान होगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार एक वैकल्पिक केंद्र तैयार करना चाहती है।
बैकअप के तौर पर काम करेगी नई राजधानी
जापान सरकार का स्पष्ट कहना है कि जो नई राजधानी बनाई जाएगी, वह मुख्य रूप से एक बैकअप के तौर पर काम करेगी। यदि भविष्य में टोक्यो में कोई बड़ी दुर्घटना या भूकंप जैसा हादसा होता है, तो देश के शासन और प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस नई राजधानी का उपयोग किया जाएगा। इस योजना पर 2010 से काम चल रहा है और अब इसे अमली जामा पहनाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां संकट के समय भी प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।
ओसाका और अन्य दावेदार शहर
नई राजधानी की दौड़ में ओसाका को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ओसाका जापान का एक ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। ओसाका के अलावा मियागी, होक्काइडो और फुकुओका जैसे शहर भी इस रेस में शामिल हैं। सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि नई राजधानी के रूप में उन्हीं शहरों को विकसित किया जाएगा जो 4 प्रमुख अहर्ताओं को पूरा करते हों। इन शर्तों में पर्याप्त सरकारी बुनियादी ढांचा, मजबूत आर्थिक स्तर, जनसंख्या का उचित आकार और बेहतर प्रशासनिक क्षमता शामिल है।
प्रस्ताव पर राजनीतिक विवाद
हालांकि, सरकार के इस फैसले पर जापान में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि दूसरी राजधानी बनाने के इस फैसले का सीधा राजनीतिक लाभ जापान इनोवेशन पार्टी को मिल सकता है और ब्लूमबर्ग के अनुसार, सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है। इन सबके बावजूद, सना ताकाइची सरकार भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
