अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति वार्ता की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार सुबह (भारतीय समय के मुताबिक शाम) इस्लामाबाद के लिए रवाना हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, व्हाइट हाउस सोमवार तक इस इंतजार में रहा कि ईरान बातचीत के लिए अपनी टीम भेजेगा या नहीं। बताया जा रहा है कि ईरान के अंदर भी इस पर मतभेद थे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का दबाव था कि जब तक अमेरिका अपनी पाबंदियां खत्म नहीं करता, तब तक बातचीत नहीं होनी चाहिए।
ईरानी डेलिगेशन को मिली मंजूरी और मध्यस्थों की भूमिका
इस बीच पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों ने ईरान को बातचीत के लिए मनाने की कोशिश की। सोमवार रात ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने डेलिगेशन भेजने को मंजूरी दे दी, जिसके बाद बातचीत की राह खुली। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से दी है। वेंस के साथ ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी इस्लामाबाद जा सकते हैं। बुधवार को दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हो सकती है।
22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है सीजफायर
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से चल रहा दो हफ्ते का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान पर फिर से बमबारी शुरू की जा सकती है। हालांकि इतने कम समय में पूरा समझौता होना मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन अगर बातचीत में कुछ प्रगति दिखती है तो ट्रंप सीजफायर की सीमा बढ़ा सकते हैं।
सीजफायर विस्तार को लेकर विरोधाभासी दावे
वहीं, वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। यानी अगर तय समय तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात फिर से खराब हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि वह इस बैठक में हिस्सा लेगा, लेकिन उसने मध्यस्थ देशों को संकेत दिया है कि वह अपनी टीम भेज सकता है और इधर पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर दो हफ्ते और बढ़ सकता है।
