केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को बेचैनी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने असहजता महसूस की थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया और एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनकी स्थिति की बारीकी से निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य जांच और वर्तमान स्थिति
एम्स प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की कई महत्वपूर्ण चिकित्सा जांचें की गई हैं और इन जांचों में कोरोनरी एंजियोग्राफी भी शामिल है। अस्पताल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। एहतियात के तौर पर और बेहतर निगरानी के लिए उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम उनकी रिकवरी और स्वास्थ्य मानकों पर लगातार ध्यान दे रही है।
संसद सत्र के बाद बिगड़ी तबीयत
जेपी नड्डा को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर गुरुवार को संसद के मानसून सत्र के संपन्न होने के कुछ ही घंटों बाद सामने आई। सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में सदन के नेता के रूप में नड्डा काफी सक्रिय रहे थे। सदन की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली थी। इस व्यस्त और तनावपूर्ण दिन के बाद ही उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा।
राज्यसभा में तीखी बहस का संदर्भ
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक मंच के कथित 'शुद्धिकरण' का मुद्दा उठाया था। खड़गे ने आरोप लगाया था कि उनके संबोधन के बाद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उस स्थान पर हवन और शुद्धिकरण किया और इस पर जेपी नड्डा ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए घटना की निंदा की थी।
जेपी नड्डा का राजनीतिक सफर और परिचय
जगत प्रकाश नड्डा को भाजपा में एक कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 2 दिसंबर 1960 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक (बीए) पटना विश्वविद्यालय से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय रहे और जय प्रकाश नारायण द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भी भाग लिया। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने मंडल आयोग के विरोध में एबीवीपी की ओर से आंदोलन का नेतृत्व किया था।
करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव
- वर्ष 1989 में उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का राष्ट्रीय मंत्री चुना गया।
- वर्ष 1991 में उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।
- वर्ष 1993 में वे पहली बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए विधायक चुने गए और नेता प्रतिपक्ष बने।
- वर्ष 1998 में दोबारा चुनाव जीतने के बाद वे हिमाचल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने।
- वर्ष 2010 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया।
- वर्ष 2012 में वे राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए।
- वर्ष 2014 से 2019 तक उन्होंने केंद्र सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का कार्यभार संभाला।
- वर्ष 2019 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और जनवरी 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
