धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, सरकार ने मांगा कल तक का समय

पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच विट्ठल हाउस में अहम बैठक हुई। सरकार ने मुआवजे और एफआईआर वापसी पर सहमति जताई है, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कल तक का समय मांगा है।

पेपर लीक से जुड़े गंभीर मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को दिल्ली के विट्ठल हाउस में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। यह बैठक लगभग 1 घंटे तक चली और आंदोलन की शुरुआत के बाद से दोनों पक्षों के बीच यह दूसरी आधिकारिक मुलाकात थी। बैठक शुरू होने से पहले ही सीजेपी के फाउंडिंग प्रेसिडेंट अभिजीत दिपके ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, उनका विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।

विट्ठल हाउस के कमरा नंबर 504 में हुई गहन चर्चा

इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में किया जाना तय हुआ था, लेकिन केंद्रीय मंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अंतिम समय पर स्थान बदलकर विट्ठल हाउस कर दिया गया। बैठक विट्ठल हाउस के कमरा नंबर 504 में आयोजित की गई, जहां दोनों पक्षों ने विस्तार से अपनी बात रखी। सरकार की ओर से इस बातचीत का नेतृत्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने किया। कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका ने सरकार के सामने अपनी मांगों का मसौदा रखा। करीब 1 घंटे तक चली इस चर्चा में सरकार ने सीजेपी की कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन इस्तीफे के मुख्य मुद्दे पर विचार करने के लिए समय की मांग की।

सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें और सरकार का रुख

बैठक के समापन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चर्चा के विवरण साझा किए। सीजेपी ने बताया कि उन्होंने सरकार के समक्ष 3 प्रमुख मांगें रखी थीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा है। दूसरी मांग उन छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है जिन्होंने इस विवाद के चलते खुदकुशी की है। तीसरी मांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई 11 एफआईआर को वापस लेने की है। सीजेपी के अनुसार, सरकार ने उनकी दो मांगों पर सहमति जता दी है, जिसमें पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना और 11 एफआईआर को वापस लेना शामिल है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर सरकार ने कहा है कि उन्हें कल तक का वक्त दिया जाए।

अभिजीत दिपके का कड़ा रुख और युवाओं का प्रतिनिधित्व

बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से पहले अभिजीत दिपके ने मीडिया से बात करते हुए इस आंदोलन के स्वरूप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन देश के युवाओं का है और इसे केवल सोनम वांगचुक या दिपके तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। दिपके ने जोर देकर कहा कि यह प्रदर्शन देश के युवाओं का है, न कि किसी विपक्षी राजनीतिक दल का। " सीजेपी ने उम्मीद जताई है कि कल तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो सकता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी यह मांग नहीं मानी गई, तो वे अपने प्रदर्शन को और भी उग्र करेंगे।

सरकार की ओर से संवाद की विनम्र अपील

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी से अपील की थी कि वे सरकार के साथ बातचीत की मेज पर आएं। उन्होंने कहा था कि किसी भी मुद्दे का समाधान केवल बातचीत के माध्यम से ही संभव है। मंत्री सिंह ने पीटीआई को बताया कि पिछले 24 घंटे के भीतर सरकार की ओर से सीजेपी को बातचीत के लिए कम से कम 4 बार औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। उन्होंने इसे सरकार की ओर से एक विनम्र अपील बताते हुए कहा कि युवाओं और छात्रों के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं और उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि यह बैठक जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होगी, जो सरकार की इस मुद्दे के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और सीजेपी की प्रतिक्रिया

बैठक के दौरान सोनम वांगचुक के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वांगचुक द्वारा अपनी भूख हड़ताल खत्म किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि सरकार ने वांगचुक को हिरासत में रखा था। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि जेपी नड्डा तो उनसे मिल सकते थे, लेकिन किसी भी विपक्षी सांसद या सीजेपी के प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और दिपके ने संतोष व्यक्त किया कि सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। अब सभी की निगाहें कल पर टिकी हैं, जब सरकार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अपना अंतिम फैसला सुनाना है। सीजेपी ने साफ कर दिया है कि उनका अगला कदम सरकार के इसी फैसले पर निर्भर करेगा।