पिछले हफ्ते छात्रों के जोरदार प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान आज सोमवार को जब संसद भवन पहुंचे तो मकर द्वार पर एनडीए (NDA) सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। उनके समर्थन में वहां मौजूद सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। बीजेपी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इस्तीफे के बाद प्रधान पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए हैं। प्रधान के इस्तीफे के बाद आज पहली बार संसद की कार्यवाही शुरू हुई और उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी।
मकर द्वार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष का आमना-सामना
संसद के मकर द्वार पर आज एक तरफ जहां धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत हो रहा था, वहीं दूसरी ओर विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन भी जारी था। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के कई सांसद वहां मौजूद थे। विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) की अगुवाई में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुई घटना के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। मकर द्वार पर दोनों पक्षों की मौजूदगी से माहौल काफी गरमा गया था।
प्रियंका गांधी ने छात्रों पर दर्ज एफआईआर पर उठाए सवाल
छात्रों के मुद्दे पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। जब उनसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से माफी की मांग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि बिहार और बंगाल में छात्रों के खिलाफ अभी भी एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही हैं। " प्रियंका गांधी के इस बयान ने छात्रों के प्रति सरकार के रुख पर सवालिया निशान लगा दिया है।
पेपर लीक कानून में संशोधन और सदन का स्थगन
संसद की कार्यवाही के दौरान आज पेपर लीक कानून में संशोधन वाला बिल दोपहर 12 बजे के करीब लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही आज सुबह 11 बजे शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों के हंगामे की वजह से सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्ष के लगातार शोर-शराबे और हंगामे को देखते हुए दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सरकार इस बिल के जरिए पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि और आंदोलन का अंत
धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले हफ्ते शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस इस्तीफे के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया। इस्तीफे के कुछ देर बाद ही केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन खत्म करने को लेकर सहमति बनी। प्रधान ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि जंतर-मंतर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका देश विरोधी ताकतें फायदा न उठा पाएं और देश की एकता बनी रहे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है।
छात्रों के भविष्य पर प्रधान का बयान और विपक्षी प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पीछे छात्रों के हित का हवाला दिया था और उन्होंने कहा था कि देश के एक भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करें, इसी विचार के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजा। प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस समेत सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने इसे युवाओं की जीत करार दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रधान भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रतीक हैं और उनका इस्तीफा देना ही सही था। वहीं, पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों को उनके आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन के लिए बधाई दी और कहा, "देर आए दुरुस्त आए"।
