ब्रिक्स समिट 2026: पीएम मोदी ने क्रिटिकल मिनरल्स के वेपनाइजेशन पर चीन को चेताया

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिटिकल मिनरल्स के इस्तेमाल को हथियार बनाने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। चीन के पास वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन की 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती है।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के इस्तेमाल को लेकर वैश्विक मंच पर अपनी चिंताएं साझा कीं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन यानी इन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पीएम मोदी ने यह बात एक ओपन सेशन के दौरान कही, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे सीधे तौर पर चीन के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपना दबदबा बनाए हुए है।

वैश्विक तनाव और क्रिटिकल मिनरल्स की अहमियत

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बयान काफी मायने रखता है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा की है, वहीं दूसरी तरफ चीन ने अपने रेयर अर्थ संसाधनों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। ब्रिक्स 2026 में जब न्यू दिल्ली डेक्लेरेशन 2026 के माध्यम से टैरिफ का विरोध किया गया, उसके तुरंत बाद क्रिटिकल मिनरल्स पर चर्चा होना रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी का यह बयान उस समय आया जब शी जिनपिंग उनके बगल में ही बैठे थे, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। सवाल यह उठता है कि आखिर ये मिनरल्स इतने जरूरी क्यों हैं और चीन का इस पर कितना नियंत्रण है?

चीन के पास रेयर अर्थ का विशाल भंडार

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे यानी USGS के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास लगभग 44 मिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) का भंडार मौजूद है। इसकी तुलना में ब्राजील के पास करीब 21 मिलियन टन का रिजर्व है। चीन के मुख्य रेयर अर्थ संसाधन इनर मंगोलिया के बायान ओबो, जियांग्शी के गानझोऊ और सिचुआन के लियांगशान जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हैं। चीन की असली ताकत सिर्फ इन खनिजों के भंडार तक सीमित नहीं है, बल्कि माइनिंग के बाद उनकी प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट बनाने की क्षमता में उसकी रणनीतिक बढ़त सबसे ज्यादा है।

ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का दबदबा

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, साल 2024 में मैग्नेट रेयर अर्थ के वैश्विक माइनिंग उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत थी। रिफाइंड आउटपुट के मामले में यह हिस्सेदारी बढ़कर 91 प्रतिशत हो जाती है, जबकि सिंटर्ड परमानेंट मैग्नेट उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 94 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही दुनिया के अन्य देशों में रेयर अर्थ की माइनिंग हो रही हो, लेकिन उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक उत्पादों और हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट में बदलने की तकनीक और क्षमता काफी हद तक चीन के पास ही है।

चीन के एक्सपोर्ट कंट्रोल और लाइसेंसिंग व्यवस्था

चीन ने पिछले कुछ समय में रेयर अर्थ की सप्लाई चेन पर अपने नियंत्रण को और कड़ा किया है। अप्रैल 2025 में चीन ने सात मीडियम और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स, जिनमें समेरियम, गैडोलिनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेशियम, स्कैंडियम और यत्रियम शामिल हैं, के निर्यात पर लाइसेंस सिस्टम लागू कर दिया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में इन नियमों का दायरा और बढ़ा दिया गया। हालांकि अक्टूबर 2025 वाले विस्तारित उपायों को बाद में एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया और यह सस्पेंशन 10 नवंबर 2026 तक प्रभावी है। चीन के कस्टम डेटा के अनुसार, साल 2025 में उसका रेयर अर्थ निर्यात लगभग 62580 टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 दशमलव 9 प्रतिशत अधिक था। जनवरी-फरवरी 2026 में भी निर्यात में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो दर्शाता है कि नियंत्रण के बावजूद वैश्विक बाजार में चीन की भूमिका केंद्रीय बनी हुई है।

भारत की चीन पर निर्भरता और चुनौतियां

भारत के लिए यह मुद्दा केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि औद्योगिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। भारत के परमानेंट मैग्नेट आयात में चीन की हिस्सेदारी बहुत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में परमानेंट मैग्नेट कैटेगरी में चीन की हिस्सेदारी मात्रा के हिसाब से 85 से 90 प्रतिशत के बीच रही। कुछ औद्योगिक अनुमान तो इसे 93 प्रतिशत तक बताते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने लगभग 53700 टन परमानेंट मैग्नेट का आयात किया था। चीन की ओर से सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा भारत के ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

रेयर अर्थ मैग्नेट का तकनीकी महत्व

इन मैग्नेट का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मोटर, विंड टर्बाइन, इंडस्ट्रियल मोटर और कई हाई-टेक सिस्टम में किया जाता है। विशेष रूप से नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट अपनी शक्ति और छोटे आकार के कारण बहुत महत्वपूर्ण हैं और डिफेंस सेक्टर में भी इनका उपयोग सेंसर, रडार और प्रिसिजन टेक्नोलॉजी में होता है। यही कारण है कि इनकी सप्लाई में रुकावट एनर्जी ट्रांजिशन और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

भारत का भविष्य का रोडमैप

भारत के लिए चुनौती सिर्फ माइनिंग बढ़ाने की नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की है। भारत अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ क्रिटिकल मिनरल कोऑपरेशन पर काम कर रहा है। साथ ही घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जनवरी 2026 के एक असेसमेंट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक भारत में लगभग 1 दशमलव 4 GWh की बैटरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता चालू हो चुकी थी। भारत के लिए असली रणनीतिक चुनौती चीन की पकड़ वाले प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी क्षमता को तेजी से विकसित करना है।