ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक बड़ी कानूनी जीत मिली है। अदालत ने पार्टी को अपने तीन बैंक खातों का संचालन जारी रखने की अनुमति दे दी है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि भले ही चुनाव आयोग ने पार्टी के सिंबल को फ्रीज करने का आदेश दिया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी अपने फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आयोग का सिंबल संबंधी फैसला अभी अंतिम नहीं है और यह केवल उपचुनावों के लिए एक अस्थायी व्यवस्था है।
सिंबल फ्रीज और फंड के इस्तेमाल पर कोर्ट का रुख
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि सिंबल फ्रीज होने की स्थिति में भी तीनों बैंक खातों के इस्तेमाल में कोई कानूनी रुकावट नहीं है। जज के इस आदेश को ऋतब्रत गुट के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है, इसलिए सिंबल संबंधी आदेश को फंड के इस्तेमाल पर रोक के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस फैसले के साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है, जिससे ममता गुट को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध रहेंगे।
बैंक खातों के संचालन की प्रक्रिया और शर्तें
अदालत ने बैंक खातों के इस्तेमाल के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया भी निर्धारित की है। जस्टिस भट्टाचार्य ने बताया कि ममता तृणमूल कांग्रेस के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति इन तीनों खातों के चेक पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, इन चेकों पर कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर के भी हस्ताक्षर होने अनिवार्य होंगे। स्पेशल ऑफिसर के हस्ताक्षर के बाद ही बैंक पैसे का भुगतान करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह विशेष आदेश 29 जनवरी तक प्रभावी रहेगा। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि फंड का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो और पार्टी की दैनिक जरूरतें भी पूरी होती रहें।
कानूनी दलीलें और वित्तीय आंकड़े
ममता तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील सोहेब आलम ने अदालत में दलील दी कि शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सिंबल का मामला अभी चुनाव आयोग के पास लंबित है और दोनों गुटों को फिलहाल नए सिंबल आवंटित किए गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सिंबल न मिलने की स्थिति में भी खातों के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगनी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि इस मामले में जांच अभी जारी है। उन्होंने खुलासा किया कि इन खातों में बड़ी राशि जमा है, जिसमें से एक खाते में तो 25 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि है। राज्य सरकार की ओर से मांग की गई थी कि स्पेशल ऑफिसर के जरिए खातों के इस्तेमाल की अनुमति को रद्द कर दिया जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि और पुराना आदेश
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक की शिकायत पर पुलिस ने पार्टी के तीन बैंक खातों को सीज कर दिया था। इसके खिलाफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और खातों में मौजूद पैसे के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। इससे पहले 9 जुलाई को हुई सुनवाई में भी जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने ममता गुट को राहत दी थी। उस समय जज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि खातों को इतनी जल्दी फ्रीज क्यों किया गया और वोटिंग से पहले शिकायत की रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई थी। अब ताजा आदेश के बाद ममता गुट को 29 जनवरी तक की एक बड़ी राहत मिल गई है।
