कर्नाटक की राजनीति में पिछले कुछ समय से चल रही उथल-पुथल अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा देने की तैयारी पूरी कर ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कर्नाटक प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला राहुल गांधी का एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचे थे। इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और संभवतः कल अपना त्यागपत्र सौंप देंगे। इस फैसले के साथ ही कर्नाटक की 3 साल पुरानी सरकार में बड़े बदलाव की पटकथा लिख दी गई है।
इस्तीफे के साथ रखी गई शर्तें
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद छोड़ने के साथ ही पार्टी हाईकमान के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं। बताया जा रहा है कि उनके इस्तीफे के बाद उनके बेटे को राज्य कैबिनेट में मंत्री बनाया जाएगा। हालांकि, सिद्धारमैया खुद राज्यसभा की सीट स्वीकार करेंगे या नहीं, इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। पार्टी हाईकमान ने एक दिन पहले ही उनसे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए रास्ता बनाने और उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का आग्रह किया था। शुरुआत में सिद्धारमैया ने इस विषय पर गुरुवार को बात करने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
राज्यपाल से मुलाकात और भविष्य की रणनीति
सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा है और उम्मीद है कि वह गुरुवार को अपना इस्तीफा उन्हें सौंप देंगे। इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया से पहले वह डीके शिवकुमार और अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ नाश्ते पर मुलाकात करेंगे। राज्य में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच रणदीप सिंह सुरजेवाला ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कांग्रेस ने विधायक दल की कोई आधिकारिक बैठक नहीं बुलाई है और अभी अन्य किसी बड़े फैसले पर मुहर नहीं लगी है। उन्होंने इस मुद्दे पर किसी भी तरह की अटकलें न लगाने की सलाह दी है।
विधायकों का विरोध और सिद्धारमैया का रुख
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक देशपांडे ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने इस्तीफे के फैसले के बारे में जानकारी दी है। देशपांडे के अनुसार, जब कई मंत्रियों और विधायकों ने सिद्धारमैया के आवास पर उनसे मुलाकात की और उन पर पद न छोड़ने का दबाव बनाया, तो मुख्यमंत्री ने बहुत स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाईकमान को अपनी बात कह दी है और वह उनके फैसले का सम्मान करेंगे और कुछ विधायकों ने सुझाव दिया था कि इस पूरे मामले पर विधायक दल की बैठक में चर्चा की जानी चाहिए, लेकिन सिद्धारमैया ने इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी।
हाईकमान के प्रति प्रतिबद्धता
देशपांडे ने बताया कि सिद्धारमैया का यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी बात पर अडिग हैं। " मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं, जहां कल होने वाली मुलाकात के बाद कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है और डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो सकता है।
