प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की है, जिससे उनकी राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। यह मामला ED के तीन अधिकारियों को कथित तौर पर डराए और धमकाए जाने से जुड़ा है, जो कोलकाता में एक तलाशी अभियान के दौरान हुआ था। ED ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें तलाशी अभियान में बाधा डालना और केंद्रीय जांच एजेंसी के काम में हस्तक्षेप करना शामिल है।
ED ने अपनी याचिका में स्पष्ट रूप से कहा है कि कोलकाता में एक महत्वपूर्ण तलाशी अभियान के दौरान उसके अधिकारियों को गलत तरीके से प्रतिबंधित किया गया और उन्हें धमकाया गया और यह याचिका उन तीन ED अधिकारियों की ओर से दायर की गई है, जो इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल में मौजूद थे और कथित तौर पर इस दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। इस घटना को केंद्रीय एजेंसी ने अपने कानूनी दायरे में काम करने में एक गंभीर बाधा के रूप में देखा है, जिसके चलते उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह आरोप केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज में राज्य सरकार के कथित हस्तक्षेप को उजागर करता है।
गंभीर आरोप और कोयला घोटाला
केंद्रीय जांच एजेंसी ED द्वारा दायर याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई अन्य लोगों के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं और याचिका में विशेष रूप से कहा गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस महानिदेशक (DGP) ने तलाशी अभियान में बाधा डाली। यह मामला 2,742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले से जुड़ा है, जिसमें 8 जनवरी को की गई तलाशी में बाधा डालने का आरोप है। ED ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार और CP मनोज वर्मा के खिलाफ CBI FIR दर्ज कर जांच कराई जाए। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह मामला राज्य और। केंद्र के बीच एक बड़े टकराव का रूप ले सकता है।
तलाशी अभियान में बाधा डालने का आरोप
याचिका में विस्तार से बताया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और DGP। ने किस तरह से जबरन प्रवेश कर तलाशी की कार्रवाई को बाधित किया। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ दोपहर 12:05 बजे प्रतीक जैन के आवास में घुसीं। इसके बाद, ED द्वारा जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और। अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन एक ट्रक में रखकर ले जाए गए। यह घटना ED के तलाशी अभियान की अखंडता पर सीधे सवाल उठाती है और केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, यह कानून के शासन का उल्लंघन है। इस तरह की कार्रवाई से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास
ED की याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) समर्थकों ने हाईकोर्ट की कार्यवाही को हाईजैक करने की कोशिश की। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले, व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए TMC समर्थकों ने सुनियोजित हंगामा किया। यह आरोप न्यायिक प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव डालने के प्रयासों को दर्शाता है और eD का मानना है कि यह एक संगठित प्रयास था जिसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावित करना और कानूनी कार्यवाही में बाधा डालना था। इस तरह के आरोप न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए चिंता का विषय हैं।
CBI जांच की मांग और आगे की राह
ED ने अपनी याचिका में एक बार फिर दोहराया है कि 2,742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले में 8 जनवरी की तलाशी में बाधा डालने के आरोप में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार और CP मनोज वर्मा के खिलाफ CBI FIR दर्ज कर जांच कराई जाए। यह मांग इस बात पर जोर देती है कि ED इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है और वह चाहती है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज। हो सकती है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इस मामले का परिणाम राज्य और केंद्र के संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।