ममता बनर्जी को एक ही दिन में 3 बड़े झटके: फिरहाद का इस्तीफा, अभिषेक को ईडी का समन

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस गहरे संकट में है। बुधवार को ममता बनर्जी को तीन बड़े झटके लगे: फिरहाद हकीम ने मेयर पद छोड़ा, अभिषेक बनर्जी को ईडी ने समन भेजा और ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष के नेता बने।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं और पार्टी वर्तमान में एक गहरे संकट के दौर से गुजर रही है और ममता बनर्जी के करीबी नेता अब उनसे किनारा करते नजर आ रहे हैं। बुधवार का दिन ममता बनर्जी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि उन्हें एक ही दिन में 3 बड़े झटके लगे। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में टीएमसी की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ऋतब्रत बनर्जी को मिली विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता

ममता बनर्जी को पहला बड़ा झटका तब लगा जब ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी गई। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में विपक्ष की बढ़ती मजबूती का संकेत है। सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष का इस तरह संगठित होना टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। ऋतब्रत बनर्जी की इस नई भूमिका ने विधानसभा के भीतर शक्ति संतुलन को बदल दिया है, जिससे सत्ता पक्ष पर दबाव बढ़ गया है।

अभिषेक बनर्जी को ईडी का समन और घर पर जांच

दूसरा बड़ा झटका शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम इस मामले की जांच के सिलसिले में अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची। जांच के बाद ईडी ने अभिषेक बनर्जी को 15 जून को पूछताछ के लिए तलब किया है। शिक्षक भर्ती घोटाले ने पिछले काफी समय से राज्य की राजनीति में हलचल मचा रखी है और अब जांच की आंच सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है। अभिषेक बनर्जी को जारी किया गया यह समन पार्टी के लिए एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक मुसीबत बन सकता है।

फिरहाद हकीम का मेयर पद से इस्तीफा

तीसरा और सबसे ताजा झटका फिरहाद हकीम की ओर से आया है। उन्होंने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है और फिरहाद हकीम को ममता बनर्जी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है, ऐसे में उनका पद छोड़ना पार्टी के लिए एक बड़ा नुकसान है। नगर निगम अधिनियम के नियमों के अनुसार, फिरहाद हकीम को अपना इस्तीफा आधिकारिक तौर पर कोलकाता नगर निगम के अध्यक्ष या आयुक्त को सौंपना होगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि वह यह औपचारिक प्रक्रिया कब पूरी करते हैं।

कोलकाता नगर निगम में भारी हंगामा

दिलचस्प बात यह है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कोलकाता नगर निगम का पहला सत्र काफी हंगामेदार रहा। सदन के भीतर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक समय सत्र को रद्द करने की नौबत आ गई। यह हंगामा राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नगर निगम के भीतर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। फिरहाद हकीम का इस्तीफा इसी अस्थिरता के बीच आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कुणाल घोष का बयान और ममता बनर्जी की मंजूरी

तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम पर रोशनी डाली है। उन्होंने बताया कि फिरहाद हकीम ने बार-बार पार्टी नेतृत्व के सामने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। कुणाल घोष के अनुसार, वह खुद उस चर्चा के दौरान मौजूद थे जहां फिरहाद ने कहा था कि मौजूदा हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। नबन्ना में हुई प्रशासनिक बैठक का जिक्र करते हुए कुणाल ने कहा कि वहां भी यह बात सामने आई थी कि वर्तमान व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही है। उन्होंने आगे बताया कि ममता बनर्जी ने पिछले कुछ दिनों की स्थितियों और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद फिरहाद हकीम को महापौर पद से इस्तीफा देने की अनुमति दे दी है। कुणाल घोष का दावा है कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिरहाद की प्रतिष्ठा को कोई ठेस न पहुंचे और हालांकि, कुणाल घोष के इन दावों पर अभी तक फिरहाद हकीम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।