प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सरकार के आगामी विधायी रोडमैप को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार के पास परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है। इस घटनाक्रम से यह संभावना प्रबल हो गई है कि सरकार इसी महीने यानी अगस्त में संसद का एक विशेष सत्र बुला सकती है। इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल जैसे ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराना होगा। यदि ये बिल कानून बनते हैं, तो देश का राजनीतिक और चुनावी गणित पूरी तरह से बदल सकता है।
विधायी रणनीति और सांसदों का समर्थन
शुक्रवार को एनडीए सांसदों के साथ हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की तैयारियों का खाका पेश किया। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने 366 सांसदों का समर्थन जुटा लिया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि नियमित सत्र के दौरान इन विधेयकों पर चर्चा संभव नहीं हो पाती है, तो विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े कार्यों को गति दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने सांसदों को आश्वस्त किया कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके निर्वाचन क्षेत्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, ताकि किसी भी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
राजनीतिक गठबंधन और डीएमके की शर्तें
इन विधेयकों को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने भी इस मामले में एनडीए का साथ देने के संकेत दिए हैं, हालांकि इसके लिए उन्होंने तीन शर्तें रखी हैं। बैठक में एनडीए की एकजुटता भी दिखाई दी, जिसमें शिवसेना (शिंदे गुट) के 7 सांसद, एनसीपीआई के 20 सांसद और एनसीपी (अजित पवार गुट) के सांसद शामिल हुए। इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा सहित लगभग 45 सांसदों ने प्रधानमंत्री के साथ नाश्ते पर चर्चा की और आगामी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
जेन-जी और युवाओं से संवाद पर जोर
प्रधानमंत्री ने सांसदों को संबोधित करते हुए युवाओं, विशेषकर जेन-जी (Gen-Z) के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सांसदों को युवाओं के बीच लगातार सक्रिय रहना चाहिए और सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों की जानकारी उन तक पहुंचानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं के मन में सरकार के प्रति यदि कोई नाराजगी या नकारात्मकता है, तो उसे केवल निरंतर संवाद के जरिए ही कम किया जा सकता है। उन्होंने सांसदों से कहा कि वे युवाओं की आकांक्षाओं को समझें और उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ें।
शिवसेना (शिंदे) गुट को सुरक्षा का भरोसा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने शिवसेना (शिंदे) गुट के सांसदों की चिंताओं को भी दूर किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी निर्णय संविधान के दायरे में रहकर लिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भले ही मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है। उन्होंने इन सांसदों से विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा और आश्वासन दिया कि विकास परियोजनाओं या केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मुद्दे के लिए वे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) या स्वयं उनसे संपर्क कर सकते हैं।
विकास कार्य और व्यक्तिगत स्वास्थ्य की सलाह
प्रधानमंत्री ने सांसदों से आह्वान किया कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रभावी ढंग से उपयोग करें। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में यदि कोई बाधा आती है, तो सांसद सीधे पीएमओ से संपर्क कर सकते हैं। राजनीति के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने सांसदों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया। उन्होंने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबाळकर से उनके योगाभ्यास और स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब प्रतिनिधि स्वयं स्वस्थ रहेंगे, तभी वे देश की बेहतर सेवा कर पाएंगे। उन्होंने सभी को नियमित योग और व्यायाम करने की सलाह दी।
एनडीए में समानता और पूर्वोत्तर का विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए के भीतर समानता के सिद्धांत को दोहराया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में किसी भी दल का महत्व उसके सांसदों की संख्या के आधार पर तय नहीं होता है। एक सांसद वाले दल को भी उतना ही सम्मान और महत्व दिया जाता है, जितना कि बड़े दलों को। उन्होंने सभी सहयोगियों से मिलकर एनडीए को और मजबूत बनाने की अपील की। इसके साथ ही, उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हुआ था, लेकिन अब सरकार इसे विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
संसद की कार्यवाही और हंगामे पर चिंता
संसद के सुचारु संचालन को लेकर प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की और उन्होंने संसद को लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर बताते हुए कहा कि इसकी कार्यवाही बिना किसी बाधा के चलनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने दुख जताया कि लगातार हंगामे के कारण नए सांसदों को सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो उनके साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष से भी संवाद का प्रयास किया है, लेकिन हंगामे की स्थिति ऐसी है कि न तो विपक्ष के सांसद बोल पा रहे हैं और न ही सत्ता पक्ष के, जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
