मिडिल ईस्ट संकट के कारण कंडोम की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी मैनकाइंड फार्मा ने दी चेतावनी

ईरान में युद्ध और मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है जिसका असर अब कंडोम की कीमतों पर पड़ सकता है। मैनकाइंड फार्मा के सीईओ ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहे तो मैनफोर्स कंडोम महंगे हो सकते हैं क्योंकि उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है।

ईरान में चल रहे युद्ध और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से उत्पन्न हुए ऊर्जा संकट का प्रभाव अब भारतीय नागरिकों पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है और भारत सरकार द्वारा हाल ही में ईंधन की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के बाद अब सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण ऊर्जा क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी वस्तुओं की कमी और कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक संकट का असर अब भारतीयों के बेडरूम तक भी पहुंच सकता है क्योंकि कंडोम जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होने के संकेत मिले हैं।

मैनकाइंड फार्मा ने दी कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी

भारत की प्रतिष्ठित दवा निर्माता कंपनी मैनकाइंड फार्मा ने यह संकेत दिया है कि यदि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष इसी तरह जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। मैनफोर्स कंडोम बनाने वाली इस कंपनी के सीईओ शीतल अरोड़ा ने रॉयटर्स के साथ बातचीत में बताया कि कंपनी के पास फिलहाल अगले कुछ महीनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम नहीं होती हैं, तो मैनकाइंड फार्मा को अंततः उत्पादन की बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष और कंडोम की कीमतों का संबंध

मिडिल ईस्ट का संघर्ष और कंडोम की कीमतों आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। कंडोम निर्माण प्रक्रिया में तेल एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक होता है और हालांकि कंडोम बनाने में मुख्य रूप से प्राकृतिक लेटेक्स का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके निर्माण में लगने वाले केमिकल्स, लुब्रिकेंट्स और पैकेजिंग सामग्री पूरी तरह से पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर करती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं और अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक के स्तर पर पहुंच गई हैं।

बाजार पर प्रभाव और अन्य कंपनियों की स्थिति

मैनफोर्स को भारत के सबसे किफायती कंडोम ब्रांडों में से एक माना जाता है, जिसके 10 कंडोम वाले एक पैक की कीमत आमतौर पर लगभग 100 से 150 रुपये के बीच होती है। बढ़ती लागत की इस समस्या से केवल मैनकाइंड फार्मा ही नहीं जूझ रही है। पिछले महीने, मलेशिया की दिग्गज कंपनी कैरेक्स, जो ड्यूरेक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए कंडोम की सप्लाई करती है, उसने भी मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन में आई दिक्कतों का हवाला देते हुए कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था।

कच्चे माल की लागत में भारी वृद्धि

फरवरी में संघर्ष की शुरुआत के तुरंत बाद से ही कैरेक्स ने अपनी पूरी सप्लाई चेन में लागत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर सामग्री की कीमत बढ़ गई है। इन सभी सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के कारण निर्माताओं के लिए मौजूदा दरों पर उत्पादन जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को कंडोम के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।