पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्धविराम की कोशिशों के बीच एक बहुत बड़ा कोहराम मचने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एक टॉप सीक्रेट रिपोर्ट ने दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने अरब देशों को दहलाने का एक पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। ईरान का कुख्यात 'बैत सिस्टम' अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है, जो इस बात का संकेत है कि तेहरान अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं है। जनरल अहमद वाहिदी ने इस पूरी योजना के लिए एक 'मिनी वॉर मॉडल' तैयार किया है, जिसका उद्देश्य बातचीत की मेज पर झुकने के बजाय खुद 'प्रीएम्पटिव स्ट्राइक' यानी पहले हमला करके दुश्मन को पस्त करना है।
अहमद वाहिदी का जंग का नया चक्रव्यूह
ईरान की रणनीति बहुत स्पष्ट और खतरनाक है और वह दुनिया के सामने यह नैरेटिव पेश करने की योजना बना रहा है कि उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अमेरिका और इजरायल से गंभीर खतरा है। इसी खतरे को ढाल बनाकर ईरान अपनी 'प्रीएम्पटिव स्ट्राइक' शुरू कर सकता है और इस योजना के तहत सबसे पहले अरब देशों को निशाना बनाया जाएगा। ईरान का मानना है कि अगर अरब देशों पर इतने भीषण हमले किए जाएं कि वहां हाहाकार मच जाए, तो वे खुद घबराकर डोनाल्ड ट्रंप पर स्थायी युद्धविराम के लिए दबाव बनाएंगे। ईरान ने इसके लिए 'मिशन 300' तैयार किया है, जिसके तहत वह अरब देशों के साथ-साथ इजरायल तक प्रहार करने की क्षमता रखता है। इसके लिए ईरान ने 2000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों का एक विशाल जखीरा तैयार कर लिया है।
मिसाइल ताकत और तबाही का समय
ईरान के पास खुर्रमशहर जैसी बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। इसके अलावा सेजिल मिसाइल की रेंज 1800 किलोमीटर है, जो इजरायल के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है। ईरान की सबसे आधुनिक फतह हाइपरसोनिक मिसाइल अपनी तेज गति से अरब से लेकर इजरायल तक तबाही मचाने में सक्षम है। ईरान के इस खतरनाक प्लान के मुताबिक, वह महज 5 मिनट के भीतर पूरे अरब क्षेत्र में कोहराम मचा सकता है। इसका मतलब है कि हर एक मिनट में एक नया देश ईरान के निशाने पर होगा। तेहरान से कुवैत की दूरी 770 किलोमीटर है, जहां मिसाइल पहुंचने में केवल 1 दशमलव 5 से 2 मिनट का समय लगेगा। बहरीन की 1050 किलोमीटर की दूरी को ईरान की मिसाइलें महज 2 दशमलव 5 से 3 मिनट में तय कर सकती हैं।
निशाने पर अरब देश और इजरायल
ईरान की मिसाइलें कतर तक, जो 1150 किलोमीटर दूर है, केवल 2 दशमलव 5 से 3 मिनट में पहुंच सकती हैं। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई की दूरी 1200 किलोमीटर है, जहां पहुंचने में 3 से 3 दशमलव 5 मिनट का वक्त लगेगा। सऊदी अरब जो 1300 किलोमीटर दूर है, वहां हमले के लिए 3 दशमलव 5 से 4 मिनट का समय लगेगा। सबसे दूर स्थित इजरायल, जिसकी दूरी 1600 किलोमीटर है, वहां भी ईरान की मिसाइलें केवल 4 से 5 मिनट में तबाही मचा सकती हैं। ईरान का मानना है कि अमेरिका इस समय एक लंबी और खर्चीली जंग से बचना चाहता है, इसलिए वह ईरान को समझौते की मेज पर लाना चाहता है। लेकिन ईरान ने अब अमेरिका को अपनी शर्तों पर झुकाने का मन बना लिया है।
तीन स्तरों पर हमले की योजना
ईरान ने अपने इस हमले को तीन स्तरों में बांटा है और पहले स्तर पर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। दूसरे स्तर पर अरब सागर में तैनात अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों पर हमला किया जाएगा। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण स्तर पर अरब देशों के ऊर्जा और पर्यटन क्षेत्रों को टारगेट किया जाएगा। ईरान की योजना अरब देशों को अंधेरे में डुबोने और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की है। ईरान का मानना है कि जब खाड़ी देश जलेंगे, तो वे घबराकर ट्रंप पर दबाव बनाएंगे और अंततः ट्रंप को ईरान के साथ स्थायी युद्धविराम पर हस्ताक्षर करने होंगे। हालांकि, यह मुज्तबा खामेनेई का प्लान है और अभी ट्रंप की जवाबी रणनीति का सामने आना बाकी है, क्योंकि अब तक ट्रंप के कई प्लान विफल रहे हैं।
