मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुई भीषण जंग के बाद वर्तमान में सीजफायर जारी है। हालांकि, इस क्षेत्र में तनाव का माहौल अब भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका जल्द ही ईरान के ऊपर फिर से हमले शुरू कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी बीते कुछ दिनों से लगातार ईरान को कड़ी चेतावनी और धमकी दिए जा रहे हैं और इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने रक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका को अपने 42 विमानों का नुकसान उठाना पड़ा है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अमेरिकी नुकसान
अमेरिका के लिए 42 विमानों का तबाह होना या क्षतिग्रस्त होना एक बहुत बड़ा सैन्य और रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (सीआरएस) द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाकर एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का नाम दिया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के अनेक इलाकों में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस हमले के परिणाम काफी गंभीर रहे, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत की खबर सामने आई थी।
नष्ट हुए विमानों का विस्तृत विवरण
सीआरएस की रिपोर्ट में उन सभी विमानों की सूची दी गई है जो इस ऑपरेशन के दौरान नष्ट हुए या जिन्हें गंभीर क्षति पहुंची और रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई में लड़ाकू विमानों और ड्रोनों सहित कम से कम 42 अमेरिकी विमान प्रभावित हुए। इन विमानों में 4 F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, 1 F-35A लाइटनिंग II लड़ाकू विमान और 1 A-10 थंडरबोल्ट II जमीनी हमला विमान शामिल हैं। इसके अलावा, हवाई ईंधन भरने वाले 7 केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान, एक E-3 सेंट्री AWACS विमान और दो MC-130जे कमांडो II विशेष अभियान विमानों को भी नुकसान पहुंचा है। हेलीकॉप्टर श्रेणी में एक HH-60W जॉली ग्रीन II हेलीकॉप्टर और ड्रोन श्रेणी में 24 MQ-9 रीपर ड्रोन तथा एक MQ-4सी ट्राइटन ड्रोन के नष्ट होने की पुष्टि की गई है।
युद्ध का भारी वित्तीय खर्च
विमानों के नुकसान के साथ-साथ इस युद्ध ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा बोझ डाला है और रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान के खिलाफ इस जंग में अमेरिका के करीब 29 अरब डॉलर खर्च हुए हैं। यह आंकड़ा अमेरिकी रक्षा बजट के एक बड़े हिस्से को दर्शाता है। आपको बता दें कि सीआरएस एक ऐसी संस्था है जो अमेरिकी कांग्रेस और उसकी समितियों को नीतिगत और कानूनी विश्लेषण प्रदान करती है। इसने अमेरिकी रक्षा विभाग और CENTCOM की रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के आधार पर इन नुकसानों के आंकड़ों को संकलित किया है और रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्षतिग्रस्त या तबाह हुए विमानों की यह संख्या युद्ध की स्थिति और पहचान के विभिन्न कारकों के आधार पर भविष्य में अपडेट की जा सकती है।
क्षेत्र में भविष्य की स्थिति
फिलहाल सीजफायर के बावजूद स्थिति नाजुक बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने ईरान के साथ दोबारा संघर्ष की संभावनाओं को जीवित रखा है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुए इस भारी नुकसान के बाद अमेरिका की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। 42 विमानों का नुकसान किसी भी आधुनिक वायुसेना के लिए एक बड़ी चुनौती है, और यह रिपोर्ट दर्शाती है कि ईरान के साथ संघर्ष की कीमत अमेरिका को कितनी भारी चुकानी पड़ी है।
