पश्चिम एशिया में एक बार फिर बारूदी बवंडर उठने के संकेत मिल रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान तक 4 बेहद कड़ी शर्तें भिजवाई हैं। इन शर्तों को ईरान के लिए एक प्रकार का सरेंडर माना जा रहा है और व्हाइट हाउस ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने ये शर्तें नहीं मानीं, तो इस बार ऐसा हमला होगा जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। इस कूटनीतिक हलचल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि ट्रंप के तेवर बता रहे हैं कि ईरान के पास अब समय बहुत कम बचा है।
ट्रंप की वे 4 कड़ी शर्तें
पाकिस्तान के जरिए जो संदेश ईरान तक पहुंचाया गया है, उसमें अमेरिका ने अपनी शर्तों को स्पष्ट कर दिया है। पहली शर्त यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई रियायत या छूट नहीं दी जाएगी और उसे अपना न्यूक्लियर एजेंडा हमेशा के लिए दफन करना होगा और दूसरी शर्त के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खुला रखना होगा। तीसरी शर्त में कहा गया है कि जब तक ईरान फाइनल एग्रीमेंट पर दस्तखत नहीं कर देता, तब तक उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को नहीं हटाया जाएगा। चौथी और अंतिम शर्त यह है कि युद्ध के दौरान ईरान को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई अमेरिका नहीं करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम ईरान को परमाणु हथियार रखने और इजराइल के साथ पूरे मध्य पूर्व को तबाह करने की अनुमति नहीं देंगे। ट्रंप ने प्रतिबंधों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक समझौता पूरा नहीं होता, ईरान को एक धेले की राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि लगभग सब कुछ खत्म हो गया है और अब सवाल सिर्फ यह है कि क्या इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए या वे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पिछले 2 दिनों से तेहरान में मौजूद हैं और लगातार बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात कर अमेरिकी रुख का पूरा ब्योरा उनके सामने रखा है। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बारे में भी खबर है कि वे शर्तों का आखिरी प्रस्ताव लेकर तेहरान पहुंच रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि उन्हें पाकिस्तान के जरिए अमेरिका की शर्तें मिली हैं और वे ईरान के मूल 14 सूत्रीय ढांचे के आधार पर इनकी समीक्षा कर रहे हैं।
ईरान का पलटवार और सुप्रीम लीडर का आदेश
दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने ट्रंप की शर्तों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, खामेनेई ने साफ आदेश दिया है कि ईरान का जितना भी संवर्धित यूरेनियम है, वह देश के भीतर ही रहेगा और उसे किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा और यह ट्रंप की उस सबसे बड़ी शर्त को सीधी चुनौती है जिसमें परमाणु जखीरे को देश से बाहर भेजने की बात कही गई थी। व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी स्टीफन मिलर ने ईरान को सीधी धमकी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान जलकर खाक हो जाएगा।
ईरान के भीतर से उठती विरोध की आवाजें
तेहरान से मिल रहे संकेत तनाव को और बढ़ाने वाले हैं। तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने कहा है कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को होर्मुज से नाकेबंदी हटानी होगी। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कहा है कि दुश्मन युद्ध के एक नए दौर की तैयारी कर रहा है और ईरानी सेना किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कूटनीति का दरवाजा खुला रखने की बात कही है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान से जबरन सरेंडर करा लेने की सोच अमेरिका का भ्रम है। 8 फरवरी को सीजफायर लागू होने के बाद से यह तनाव का सबसे बड़ा बिंदु बन गया है।
