शी जिनपिंग ऑन डिमांड: ट्रंप और पुतिन की बीजिंग यात्रा ने क्या चीन को बना दिया है अगला सुपर पावर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया चीन यात्रा ने वैश्विक राजनीति में शी जिनपिंग के बढ़ते कद को रेखांकित किया है। ताइवान और व्यापारिक मुद्दों पर ट्रंप की चुनौतियों से लेकर पुतिन के साथ ऊर्जा समझौतों तक, चीन अब एक नई महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।

चीन ने आज विश्व पटल पर अपनी एक विशिष्ट और शक्तिशाली पहचान बना ली है। यही मुख्य कारण है कि दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता अब बीजिंग का रुख कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी एक विशेष टीम के साथ शी जिनपिंग से मुलाकात करने बीजिंग पहुंचे थे। ट्रंप की यात्रा समाप्त होते ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शी जिनपिंग से मिलने चीन पहुंच गए। दुनिया के इन दो सबसे शक्तिशाली नेताओं का इस तरह चीन जाना और शी जिनपिंग से मुलाकात करना कई मायनों में वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।

ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात और ताइवान का मुद्दा

डोनाल्ड ट्रंप जब चीन पहुंचे, तो उनका स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति ने किया। ट्रंप के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया और उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ शी जिनपिंग से मिलवाया गया। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं क्योंकि ट्रंप को इस बैठक से कई बड़ी उम्मीदें थीं। हालांकि, चीन ने अमेरिका के कई मंसूबों पर पानी फेर दिया। चीन ने वार्ता से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह ताइवान के मुद्दे पर किसी भी तरह की चर्चा नहीं करना चाहता है। शी जिनपिंग के इस कड़े रुख ने ट्रंप के कूटनीतिक प्रयासों को एक बड़ा झटका दिया।

व्यापारिक संबंध और रेयर अर्थ मिनरल्स का दबदबा

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते दुनिया के सबसे बड़े और जटिल संबंधों में से एक हैं। जब डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ लगाने की बात की, तो चीन ने भी इसका कड़ा जवाब दिया। अमेरिका को चीन से मुख्य रूप से अरबों डॉलर के उपभोक्ता उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और औद्योगिक कल-पुर्जे प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, चीन दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसका रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन और प्रसंस्करण पर पूर्ण वर्चस्व है। ये खनिज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यही कारण है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए किसी भी प्रतिबंध का चीन पर कोई विशेष असर नहीं पड़ता है।

ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की गुहार

भू-राजनीतिक मोर्चे पर, अमेरिका ने ईरान के साथ तनाव तो बढ़ा दिया है, लेकिन अब वह इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। इसी सिलसिले में ट्रंप ने चीन से अनुरोध किया कि वह ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) खोलने के लिए राजी करे और हालांकि चीन ने इस पर सहमति तो जताई, लेकिन वर्तमान में होर्मुज का रास्ता अमेरिका के लिए बंद बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि जहां अमेरिकी जहाजों के लिए रास्ते बंद हैं, वहीं चीन के जहाज आसानी से होर्मुज को पार कर रहे हैं, जो चीन की कूटनीतिक पकड़ को दर्शाता है।

रूस और चीन की प्रगाढ़ दोस्ती और साइबेरिया-2 डील

रूस और चीन के बीच के व्यापारिक और रणनीतिक संबंध जगजाहिर हैं। पुतिन की इस बार की चीन यात्रा भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। ट्रंप के बाद जब पुतिन चीन पहुंचे, तो उनके लिए भी रेड कार्पेट बिछाया गया। शी जिनपिंग ने पुतिन का स्वागत करने के लिए अपने एक बेहद खास व्यक्ति को भेजा और दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनमें सबसे प्रमुख साइबेरिया-2 डील रही। यह एक विशाल प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना है, जो रूसी गैस को यूरोप के बजाय चीन और अन्य एशियाई बाजारों तक पहुंचाने की एक रणनीतिक पहल है। हालांकि यह डील अभी अंतिम रूप से फाइनल नहीं हुई है, लेकिन इसने भविष्य के ऊर्जा समीकरणों को बदल दिया है।

सुपर पावर बनने की राह पर चीन

मुलाकात के दौरान पुतिन ने शी जिनपिंग को एक कविता भी सुनाई, जो दोनों देशों की गहरी दोस्ती का प्रतीक बनी। इसके बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शी जिनपिंग ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधा और स्पष्ट किया कि अब दुनिया में किसी की दादागिरी नहीं चलेगी। पुतिन के साथ मिलकर शी जिनपिंग ने वैश्विक राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है। जिस तरह से दुनिया के बड़े नेता अब चीन के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि चीन अब अगला सुपर पावर बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ चुका है।