मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: द्वारका टनल और बुंदेलखंड हाईवे को मिली मंजूरी

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने दिल्ली में 6-लेन द्वारका टनल और यूपी में कानपुर-कबराई हाईवे को मंजूरी दी है। 6970 करोड़ रुपये की लागत वाली टनल और 242 किलोमीटर लंबा हाईवे विकास को नई गति देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को दो अत्यंत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी देकर देश के विकास पथ को नई दिशा दी है। इन फैसलों में से पहला दिल्ली की शहरी कनेक्टिविटी को सुधारने पर केंद्रित है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आर्थिक क्रांति लाने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं के विवरण साझा करते हुए बताया कि ये सभी निर्णय भारत के 2047 के विजन को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।

द्वारका टनल: दिल्लीवासियों की पुरानी मांग होगी पूरी

कैबिनेट का पहला बड़ा फैसला दिल्ली में 6-लेन द्वारका टनल के निर्माण को लेकर है। यह परियोजना दिल्ली के लोगों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगी और इस टनल की कुल लंबाई 8 किलोमीटर होगी और इसके निर्माण पर 6970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। यह टनल एक बिल्कुल नए कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगी, जिससे दिल्ली के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा और लोगों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण तकनीक है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि टनल का निर्माण दिल्ली के 'रिज' क्षेत्र को बिना किसी नुकसान पहुंचाए किया जाएगा और रिज क्षेत्र की पारिस्थितिक महत्ता को देखते हुए, टनल को जमीन के नीचे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ऊपर की हरियाली और पर्यावरण पूरी तरह सुरक्षित रहे। यह विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा।

कानपुर-कबराई हाईवे: बुंदेलखंड के लिए विकास का नया मार्ग

दूसरा प्रमुख प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है। यह हाईवे कानपुर से भोपाल के बीच के एक महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करता है। कैबिनेट ने कानपुर से कबराई तक के 242 किलोमीटर लंबे हिस्से को मंजूरी दी है। यह मार्ग कानपुर से शुरू होकर हमीरपुर, कबराई और महोबा होते हुए आगे भोपाल तक जाएगा। यह अलाइनमेंट इस क्षेत्र का मुख्य रूट है और बुंदेलखंड के कई पिछड़े हिस्सों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ेगा।

यह हाईवे एक एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग होगा, जो एक्सप्रेसवे की तर्ज पर काम करेगा। इसका निर्माण बीओटी यानी बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर टोल मॉडल के तहत किया जाएगा। इस परियोजना में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह के हिस्से शामिल होंगे। 5 साल की समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह हाईवे कानपुर, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगा।

डिफेंस कॉरिडोर और आर्थिक विकास को मिलेगी मजबूती

बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्तमान में कई नई रक्षा गतिविधियां शुरू हो रही हैं और उत्तर प्रदेश का डिफेंस कॉरिडोर भी इसी क्षेत्र में स्थित है और इस नए हाईवे के बनने से डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चल रहे प्रोजेक्ट्स को जबरदस्त गति मिलेगी। यह प्रोजेक्ट कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और कबराई में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत यात्रा के समय में आने वाली कमी होगी। 5 घंटे का समय लगता है। 5 घंटे का रह जाएगा। समय की यह बचत न केवल यात्रियों के लिए सुखद होगी, बल्कि व्यापारिक माल की ढुलाई में भी तेजी आएगी।

प्रधानमंत्री का निर्देश और 2047 का विजन

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्लानिंग हमेशा 2047 को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। इसी सोच के तहत, कानपुर-कबराई हाईवे को वर्तमान में 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बनाया जा रहा है, लेकिन इसके स्ट्रक्चर को 6 लेन के हिसाब से डिजाइन किया गया है ताकि भविष्य में विस्तार की जरूरत पड़ने पर कोई बाधा न आए। आज रखा जा रहा आधार भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।