अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा बने ईरान के सुप्रीम लीडर, ट्रंप ने कहा था 'स्वीकार नहीं'

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद हुई है। मोजतबा अब सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कमान संभालेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नियुक्ति पर असहमति जताई है।

ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव हुआ है। अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने सोमवार सुबह आधिकारिक तौर पर इस नियुक्ति की घोषणा की। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में जारी तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच सामने आया है। 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद के लिए एक प्रमुख उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान एक गंभीर क्षेत्रीय संकट का सामना कर रहा है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त सैन्य हमले में हुई है। इस हमले के बाद ईरान की सर्वोच्च परिषद और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उत्तराधिकार की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया। मोजतबा खामेनेई अब ईरान के सभी रणनीतिक मामलों में अंतिम निर्णय लेने वाले अधिकारी होंगे। वे न केवल धार्मिक प्रमुख के रूप में कार्य करेंगे, बल्कि सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में सुप्रीम लीडर के पद पर यह केवल दूसरी बार सत्ता का हस्तांतरण है।

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की चयन प्रक्रिया

मोजतबा खामेनेई का चयन ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स, जिसे मजलिस-ए-खोबरेगान भी कहा जाता है, द्वारा किया गया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, असेंबली ने उन्हें निर्णायक बहुमत के साथ चुना। चयन के बाद जारी एक आधिकारिक बयान में देश के नागरिकों से नए नेतृत्व के पीछे एकजुट रहने का आह्वान किया गया है। तेहरान के विभिन्न हिस्सों से इस घोषणा के बाद समर्थकों के एकत्र होने की खबरें भी प्राप्त हुई हैं। यह संस्था ईरान के सुप्रीम लीडर को चुनने और उन पर निगरानी रखने के लिए संवैधानिक रूप से जिम्मेदार है।

मोजतबा खामेनेई का सैन्य और धार्मिक प्रोफाइल

मोजतबा खामेनेई एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और उनका ईरान के सुरक्षा तंत्र के साथ गहरा संबंध रहा है। 56 साल की उम्र में वे देश के सबसे शक्तिशाली पद पर आसीन हुए हैं। मोजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें सैन्य हलकों में सम्मान प्राप्त हुआ और उनके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ घनिष्ठ संबंध माने जाते हैं। वर्ष 2019 में, अमेरिकी वित्त विभाग ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। वे पिछले कई वर्षों से अपने पिता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सुरक्षा कार्यों का प्रबंधन कर रहे थे।

डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय रुख

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने एबीसी न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि वे मोजतबा खामेनेई को ईरान के नेता के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं। ट्रंप के अनुसार, वे एक ऐसे नेतृत्व की अपेक्षा करते हैं जो क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में काम करे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी समर्थन या अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बिना नए नेतृत्व के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी। हालांकि, ईरान के भीतर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मोजतबा की नियुक्ति का पूर्ण समर्थन किया है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है।

युद्ध की वर्तमान स्थिति और हताहतों का विवरण

ईरान और उसके विरोधियों के बीच जारी सैन्य संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस जंग में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की जान जा चुकी है। लेबनान में हताहतों की संख्या 397 दर्ज की गई है, जबकि इजरायल में 11 लोगों की मौत हुई है। इस संघर्ष में अमेरिकी सेना के 7 सदस्य भी मारे गए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों में किसी भी प्रकार का सहयोग न करें।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सत्ता का नया ढांचा

मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। IRGC ने नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है। मोजतबा के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और सैन्य रणनीति में निरंतरता रहने की संभावना जताई जा रही है। नए सुप्रीम लीडर के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की आर्थिक स्थिति को संभालना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच सैन्य प्रभाव को बनाए रखना है। तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है और नए नेतृत्व के तहत प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।