धर्म / नवरात्रि 2019: जानिए 9 दिनों में किस दिन किस देवी की अराधना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है

Live Hindustan : Sep 29, 2019, 08:17 AM

Navratri 2019 | श्राद्ध या पितृ पक्ष के खत्म होते ही रविवार, 29 सितंबर से शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र का बहुत बड़ा महत्व है। खास बात यह है कि इस बार नवरात्रों में बेहद दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। बता दें, इस बार नवरात्र में सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग एकसाथ बनते नजर आएंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस सर्वसिद्धि योग को बेहद शुभ माना जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं नवरात्रि के पूरे 9 दिनों में किस दिन किस देवी की अराधना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।   

1- प्रथम शैलपुत्री-

नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा पर घरों में घटस्थापना की जाती है। प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री के स्वरूप का पूजन होता है। शैलपुत्री को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम माना गया है। मान्यता है कि नवरात्र में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को चंद्र दोष से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं नवरात्रों में मां के किस स्वरूप की होती है पूजा। 

प्रतिपदा का रंग है पीला- 

पीला रंग ब्रह्स्पति का प्रतीक है। किसी भी मांगलिक कार्य में इस रंग की उपयोगिता सर्वाधिक मानी गई है। इस रंग का संबंध जहां वैराग्य से है वहीं पवित्रता और मित्रता भी इसके दो प्रमुख गुण हैं।  

2- द्वितीया ब्रह्मचारिणी -

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन अर्थात् द्वितीया तिथि पर देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का दर्शन पूजन किया जाएगा। द्वितीया 30 सितंबर,सोमवार को पड़ेगी। ब्रह्म का अर्थ तप है और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली। तप का आचरण करने वाली देवी के रूप में भगवती दुर्गा के द्वितीय स्वरूप का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया था। देवी दुर्गा के तपस्विनी स्वरूप के दर्शन-पूजन से भक्तों और साधकों को अनंत शुभफल प्राप्त होते हैं। संन्यासियों के लिए इस स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी है। देवी ब्रह्मचारिणी का मंदिर काल भैरवमंदिर के पीछे सजी मंडी से दाहिनी तरफ गली में है। जो वर्तमान दुर्गा घाट के नाम से जाना जाता है।  

द्वितीया पर हरा रंग हर्षित करेगा मन-

हरा रंग बुध ग्रह का  प्रतीक माना गया है। इस रंग के उपयोग से जहां जीवन में प्रेम का प्राबल्य बढ़ता है वहीं जीवन में हर्ष को भी प्रवेश मिलता है। हरे रंग का प्रयोग मन-मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। द्वितीया के पूजन में हरे रंग की विशिष्ट महत्ता है। 

3-तृतीया चंद्रघंटा- 

शारदीय नवरात्र की तृतीया तिथि इस वर्ष एक अक्तूबर को मंगलवार के दिन पड़ेगी। तृतीया पर काशी में देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है। देवी पुराण के अनुसार देवी दुर्गा के तृतीय स्वरूप को चंद्रघंटा नाम मिला। देवी के चंद्रघंटा स्वरूप का ध्यान करने से भक्त का इहलोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। शारदीय नवरात्र की तृतीया तिथि पर देवी के दर्शन से सद्गति की प्राप्ति होती है। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्द्धचंद्र शुभोभित है इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। वाराणसी क्षेत्र के मध्य स्थित हैं। लिंंगपुराण के कथन ‘चंद्रघंटा च मध्यत:’ के अनुसार देवी चंद्रघंटा ही वाराणसी क्षेत्र के रक्षा करती हैं। देवी का मंदिर चौक थाने के निकट मजार के सामने वाली गली में है। 

तृतीया पर भूरा रंग दूर रखेगा भ्रम से-

भ्रम व्यक्ति के विकास की सबसे बड़ी बाधा है। शारदीय नवरात्र में तृतीया तिथि पर भूरे रंग का उपयोग आप को भ्रम की बाधा से दूर रखेगा। इस रंग का उपयोग आप को व्यर्थ के विवादों में पड़ने से बचाएगा। साथ ही असमंजस की स्थिति से भी छुटकारा मिलेगा।  

4-चतुर्थी कूष्मांडा- 

नवरात्र में देवी दर्शन के क्रम में चतुर्थी तिथि इस वर्ष दो अक्तूबर बुधवार के दिन पड़ेगी। शारदीय नवरात्र की इस तिथि पर देवी के कूष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने का विधान है।  

शारदीय नवरात्र की चतुर्थी तिथि पर देवी के कुष्मांडा स्वरूप का दर्शन-पूजन करने से मनुष्य के समस्त   पापों का क्षय हो जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि अपनी मंद मुस्कान  से पिंड से ब्रहमांड तक का सृजन  देवी ने कूष्मांडा स्वरूप में ही किया था। देवी के कुष्मांडा स्वरूप के   दर्शन पूजन करने रोग और शोक का हरण होता है साथ ही साथ यश और धन में भी अपेक्षित वृद्धि होती है।  काशी में देवी के प्रकट होने की कथा राजा सुबाहु से जुड़ी हुई है। काशी में देवी देवी कुष्मांडा का मंदिर दुर्गाकुंड इलाके में विशाल कुंड के निकट है। माना जाता है कि इस कुंड का सीधा संबंध मां गंगा से है। इसका जल कभी नहीं सूखता है।  

चतुर्थी तिथि पर नारंगी रंग खोलेगा ज्ञान और ऊर्जा के द्वार

नारंगी रंग लाल और पीले रंग से मिलकर बना है। ऐसे में यह रंग दोनों रंगों का असर एक साथ अपने अंदर समाहित किए रहता है। नारंगी रंग ज्ञान, ऊर्जा, शक्ति, प्रेम और आनंद का प्रतीक है। चतुर्थी तिथि पर इस रंग के उपयोग से  मंगल और बृहस्पति दोनों ग्रहों की कृपा एक साथ प्राप्त की जा सकती है। साथ ही सूर्यदेव भी प्रसन्न होते हैं। 

5-पंचमी स्कंदमाता- 

शादरीय नवरात्र का पांचवा दिन पंचमी तिथि कहलाती है। इस वर्ष पंचमी तिथि तीन अक्तूबर को गुरुवार के दिन पड़ रही है। इस तिथि पर देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप का दर्शन पूजन होता है।  

भगवती भवानी के पंचम स्वरूप (स्कंदमाता) की उपासना का विशेष विधान शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि पर है। देवी के इस स्वरूप की आराधना से जहां व्यक्ति की संपूर्ण सद्कामनाएं पूर्ण होती हैं वहीं उसके मोक्ष का मार्ग भी सुगम्य हो जाता है।  स्कंद कार्तिकेय की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता नाम मिला है। काशी खंड, देवी पुराण और स्कंदपुराण में देवी के स्कंदमाता स्वरूप का विराट वर्णन किया गया है। काशी में स्कंदमाता का मंदिर जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर परिसर में है। सिर्फ नवरात्र में ही पूरे दिन देवी का मंदिर खुला रहता है। अन्यथा पूर्वाह्न के बाद ही देवी मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।  

पंचमी पर सफेद रंग देगा शांति और सादगी-

सफ़ेद रंग शांति,पावनता और सादगी को दर्शाता है। इस रंग के प्रयोग से चंद्रमा और शुक्र की कृपा बनी रहती है। मन की एकाग्रता व शांति के लिए पंचमी तिथि पर इस रंगा का उपयोग सर्वोपरि माना गया है। यह रंग चंद्रमा का भी प्रतीक है। पंचमी तिथि के पूजन में इस रंग की प्रधानता लाभदायक होती है।   

6-षष्ठी कात्यायनी- 

शारदीय नवरात्र का छठा दिन षष्ठी तिथि कहलाता है। षष्ठी तिथि चार अक्तूबर को शुक्रवार के दिन पड़ रही है। इस दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है।  देवी दुर्गा के छठे स्वरूप का दर्शन साधकों को सद्गति प्रदान करने वाला कहा गया है। शारदीय नवरात्र में षष्ठी तिथि पर देवी के दर्शन पूजन का विशेष महात्म्य देवी पुराण और स्कंदपुराण में बताया गया है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि भगवती के इस स्वरूप की महिमा का वर्णन शब्दों में नहीं हो सकता। कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन ने कठिन तपस्या करके भगवती परांबा से अपनी पुत्री के रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा था। उनकी पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। देवी का विग्रह संकठा घाट पर है।  

षष्ठी:लाल रंग आप में भरेगा उत्साह और साहस

लाल रंग को मंगल और सूर्य का संयुक्त प्रतीक माना गया है। यह प्रेम, उत्साह और साहस का रंग है। घर की दीवारों का रंग लाल नहीं रखना चाहिए न ही शयनकक्ष में लाल चादर बिछानी चाहिए। षष्ठी तिथि पर लाल रंग का उपयोग आप के लिए लाभदायक होगा। 

7-सप्तमी कालरात्रि- 

देवी दुर्गा की आराधना क्रम में नवरात्र की सप्तमी तिथि पर देवी के कालरात्रि सवरूप का पूजन किया जाता है। सप्तमी तिथि अक्तूबर को शनिवार के दिन पड़ेगी।  

शारदीय नवरात्र में सप्तमी तिथि पर देवी के कालरात्रि स्वरूप के दर्शन पूजन का विधान है। इनके स्वरूप, स्वभाव और प्रभाव का आभास उनके नाम से ही हो जाता है। अंधकारमय परिस्थितियों का नाश करने वाली देवी अपने भक्त की  काल से भी रक्षा करती हैं।  देवी कालरात्रि के दर्शन पूजन नौ ग्रहों द्वारा खड़ी की जाने वाली बाधाएं दूर हो  जतीा हैं। देवी कृष्णवर्ण की हैं। देवी की उपासना करने से अष्ट सिद्धियां और नौ निधियों की प्राप्ति होती है। देवी कालरात्रि का मंदिर विश्वनाथ मंदिर के निकट कालिका गगी में है। 

सप्तमी पर नीला रंग जोड़ेगा सामाजिकता से-

शारदीय नवरात्र के पूजन में सप्तमी तिथि पर नीले रंग का उपयोग सामाजिक दृष्टिकोण से आप के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा। इस रंग की विशेषता यह है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव छोड़ता है। यह रंग राहु को नियंत्रित करने वाला भी होता है। 

8-अष्टमी महागौरी- 

दुर्गा नवरात्र के  भी नाम से जाने जाने वाले शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि छह अक्तूबर को रविवार के दिन पड़ेगी। इस तिथि पर देवी के महागौरी स्वरूप का पूजन होगा। 

शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर देवी दुर्गा के महागौरी का संबंध देवी गंगा से भी है। धर्म गं्रथों में देवी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस स्वरूप के दर्शन मात्र से पूर्व संचित समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। देवी की साधना करने वालों को समस्त लौकिक एवं अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। पति रूप में शिव को पाने के लिए कठोर तप से देवी कृष्णवर्ण की हो गई थीं तब शिव ने मां गंगा के जल से अभिषेक कर देवी की कांति लौटाई और वह महागौरी कहलाईं। काशी में देवी अन्नपूर्णा ही महागौरी का स्वरूप हैं। 

अष्टमी पर गुलाबी रंग बनाएगा बलशाली-

शुक्र, चंद्र और मंगल का संयुक्त रंग गुलाबी माना गया है लेकिन शुक्र ग्रह इससे सर्वाधिक प्रभावित होता है। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर इस रंग का अधिकाधिक उपयोग शारीरिक बल को संपुष्ट करता है। शयन और अतिथि कक्ष में इसका उपयोग लाभकारी होगा। 

9-नवमी सिद्धिदात्री- 

शारदीय नवरात्र का नौवां दिन नवमी तिथि कहलाती है। इस वर्ष नवमी की तिथि सात अक्तूबर को सोमवार के दिन पड़ेगी। इस तिथि पर देवी के सिद्धिदात्री स्वरूप का दर्शन-पूजन होगा। देवी का यह स्वरूप समस्त प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाला है। इसी आधार पर देवी का नामकरण हुआ और उन्हें सिद्धिदात्रि कहा गया। हिमाचल के नंदा पर्वत पर देवी का मूल स्थान है। देवी की कृपा से उनका उपासक कठिन से कठिन कार्य भी सरलता पूर्वक संपादित कर लेता है। देवी की साधना से समस्त प्रकार की सद्कामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान शिव को भी सिद्धिदात्रि की कृपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त हुईं। काशी में देवी सिद्धिदात्रि का मंदिर मैदागिन क्षेत्र में गोलघर क्षेत्र स्थित सिद्धमाता गली में विद्यमान है।  

बैगनी रंग आप में भरेगा ओज-

शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर बैगनी रंग का उपयोग आपके जीवन में ओज भरेगा। ज्योतिष में इसे हिंसक रंग भी कहा गया है लेकिन धार्मिक कार्यों में इस रंग का उपयोग सकारात्मक फल देता है। यह रंग आपके आसपास के परिवेष में घुली नकारात्मकता को भी दूर करने में भरपूर सहायक होता है।