भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखा है, जब उन्होंने शहर के पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ली। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को कुरान पर हाथ रखकर पद की शपथ ग्रहण की और न्यूयॉर्क सिटी के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी मेयर ने बाइबिल के बजाय कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली हो, जो शहर की बढ़ती विविधता और बदलती पहचान का प्रतीक है।
एक ऐतिहासिक शपथ समारोह
शपथ ग्रहण समारोह दो चरणों में संपन्न हुआ। पहला समारोह न्यूयॉर्क के सिटी हॉल के नीचे स्थित एक बंद पड़े सबवे स्टेशन में आयोजित किया गया था। यह एक निजी और अंतरंग कार्यक्रम था, जिसमें केवल ममदानी का परिवार शामिल हुआ। इस गोपनीय स्थान का चुनाव शायद इस ऐतिहासिक पल की गरिमा और व्यक्तिगत महत्व को दर्शाता है। इस निजी समारोह के बाद, दोपहर में एक सार्वजनिक शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें व्यापक समुदाय और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। यह दोहरी व्यवस्था ममदानी के व्यक्तिगत विश्वास और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दोनों को दर्शाती है।
पवित्र ग्रंथ: महत्वपूर्ण कुरान
जोहरान ममदानी ने अपनी शपथ के लिए दो कुरानों का उपयोग किया, जो इस समारोह को और भी प्रतीकात्मक बनाते हैं। इनमें से एक उनके दादा की कुरान थी, जो पारिवारिक विरासत और जड़ों के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। दूसरी कुरान एक पॉकेट साइज की छोटी कुरान थी, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत की है। यह पॉकेट साइज कुरान न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर। रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन पवित्र ग्रंथों का चयन ममदानी की पत्नी रमा दुवाजी ने किया था, और इस कार्य में उनकी मदद एक स्कॉलर ने की थी। यह चयन शहर की बड़ी और लंबे समय से मौजूद मुस्लिम आबादी को दर्शाता है, जो न्यूयॉर्क की सांस्कृतिक विविधता का एक अभिन्न अंग है।
शपथ में इस्तेमाल होने वाली कुरान का इतिहास
शॉम्बर्ग सेंटर में मौजूद पॉकेट साइज कुरान का एक समृद्ध इतिहास है। यह अश्वेत प्यूर्टो रिकन इतिहासकार आर्तुरो शॉम्बर्ग के संग्रह का हिस्सा थी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह कुरान ममदानी के पास कैसे पहुंची, लेकिन विद्वानों का मानना है कि यह। अमेरिका और अफ्रीका में इस्लाम और अश्वेत संस्कृतियों के ऐतिहासिक संबंधों में शॉम्बर्ग की गहरी रुचि को दर्शाती है। यह कुरान सादे डिजाइन की है, जिस पर गहरे लाल रंग की जिल्द लगी है और फूलों की आकृति बनी हुई है। अंदर काले-लाल स्याही में लिखा गया है, जो यह बताता है कि इसे केवल प्रदर्शनी के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था। चूंकि कुरान पर कोई तारीख या लेखक का नाम नहीं है, इसलिए इसकी उम्र का अनुमान इसके लेखन और जिल्द के आधार पर लगाया गया है। माना जाता है कि यह उस्मानी दौर में, 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत में। तैयार हुई थी, उस क्षेत्र में जो आज के सीरिया, लेबनान, इजराइल, फिलिस्तीनी इलाके और जॉर्डन में शामिल है। न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी की क्यूरेटर हिबा आबिद के अनुसार, इस कुरान की न्यूयॉर्क तक की यात्रा ममदानी के व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से मेल खाती है और ममदानी भारतीय मूल के न्यूयॉर्कवासी हैं, जिनका जन्म युगांडा में हुआ था, जबकि उनकी पत्नी अमेरिकी-सीरियाई हैं। यह कुरान और ममदानी का जीवन दोनों ही वैश्विक जुड़ाव और विविध सांस्कृतिक विरासत की कहानियाँ कहते हैं।
एक बहुआयामी पहचान और ऐतिहासिक जीत
34 वर्षीय डेमोक्रेट ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर होने के साथ-साथ कई अन्य ऐतिहासिक उपलब्धियों के भी धनी हैं। वह शहर के पहले दक्षिण एशियाई और पहले अफ्रीका में जन्मे मेयर भी हैं। उनकी जीत ने न्यूयॉर्क के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है, क्योंकि वह पिछले 100 सालों में न्यूयॉर्क के सबसे युवा मेयर भी हैं और 4 नवंबर, 2025 को ममदानी ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर का चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। यह जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह शहर की बदलती जनसांख्यिकी और समावेशी राजनीति का भी प्रमाण है। ममदानी भारतीय मूल की प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मीरा नायर (जिन्होंने 'मानसून वेडिंग' और 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्में निर्देशित की हैं) और महमूद ममदानी के बेटे हैं, जो उनकी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को दर्शाता है।
एक अभियान जो लोगों से जुड़ा
चुनाव अभियान के दौरान, ममदानी ने महंगाई को एक प्रमुख मुद्दा। बनाया था, जो आम न्यूयॉर्कवासियों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है। उन्होंने अपने धार्मिक विश्वासों को भी खुलकर सामने रखा, जिससे उन्हें मुस्लिम समुदाय में व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने शहर की मस्जिदों का दौरा किया और पहली बार मतदान। करने वाले कई दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन हासिल किया। यह रणनीति उनकी जीत में महत्वपूर्ण साबित हुई, क्योंकि उन्होंने विभिन्न समुदायों। के साथ गहरे संबंध स्थापित किए और उनकी चिंताओं को संबोधित किया।
विजय भाषण: 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' का न्यूयॉर्क संस्करण
चुनाव में जीत के बाद, ममदानी ने ब्रुकलिन पैरामाउंट थिएटर में अपने समर्थकों को संबोधित किया। अपनी विजय स्पीच में, उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को दिए गए प्रसिद्ध 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' भाषण का जिक्र किया। यह संदर्भ उनके भारतीय मूल और एक नए युग की शुरुआत के प्रति उनकी दृष्टि को दर्शाता है। इस दौरान उनकी पत्नी रामा दुवाजी, पिता महमूद ममदानी और मां मीरा नायर भी मंच पर मौजूद थे, जो उनके परिवार के समर्थन और गर्व को उजागर करता है। ममदानी ने अपने भाषण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की इमिग्रेशन नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि 'न्यूयॉर्क इमिग्रेंट्स का शहर है। इस शहर को प्रवासियों ने बनाया, उन्होंने मेहनत से इसे चलाया, और आज से, यह शहर प्रवासी ही चलाएगा और यह हमारी पहचान है और हम इसे बचाएंगे। ' यह बयान न्यूयॉर्क की प्रवासी आबादी के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और उनके अधिकारों की रक्षा के उनके संकल्प को दर्शाता है।
उत्सव और भविष्य की आशाएं
भाषण के बाद, जोहरान ममदानी अपनी पत्नी के साथ 'धूम मचा ले' गाने पर झूमते नजर आए, जो उनकी जीत के उत्साह और भारतीय सांस्कृतिक जड़ों का एक जीवंत प्रदर्शन था। उनकी मां मीरा नायर मंच पर आकर उन्हें गले लगा लिया, और उनके पिता महमूद ममदानी भी इस खुशी के पल में मौजूद थे। यह क्षण न केवल एक राजनीतिक जीत का उत्सव था, बल्कि एक सांस्कृतिक और व्यक्तिगत विजय का भी प्रतीक था, जो न्यूयॉर्क सिटी के भविष्य के लिए नई आशाएं जगाता है। ममदानी का कार्यकाल शहर के लिए एक नए युग की शुरुआत। का प्रतीक है, जहां विविधता और समावेशिता को प्राथमिकता दी जाएगी।