पाकिस्तान-अफगानिस्तान सैन्य संघर्ष तेज: ईरान ने की मध्यस्थता की पेशकश

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा पर सैन्य संघर्ष तेज हो गया है। पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गजब लिल हक' शुरू किया है, जबकि तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जे का दावा किया है। इस बीच, ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा पर तनाव एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में बदल गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर तालिबान के ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले किए हैं, जिसे 'ऑपरेशन गजब लिल हक' का नाम दिया गया है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाने और कई सैनिकों को हिरासत में लेने का दावा किया है और इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ईरान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने स्पष्ट किया है कि देश की क्षेत्रीय अखंडता और शांति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान का 'ऑपरेशन गजब लिल हक' और सैन्य कार्रवाई

पाकिस्तान के सरकारी ब्रॉडकास्टर PTV न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान वायुसेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया में अफगान तालिबान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन गजब लिल हक' नाम दिया गया है, जिसका अर्थ 'सत्य के लिए संघर्ष' बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में काबुल में 2 ब्रिगेड मुख्यालय और कंधार में एक कोर मुख्यालय सहित कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नष्ट कर दिया गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में कम से कम 133 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 200 से अधिक घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, तालिबान शासन की 27 चौकियों को नष्ट करने और 9 अन्य पर कब्जा करने की सूचना दी गई है।

अफगान तालिबान के जवाबी हमले और क्षेत्रीय दावे

अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने पाकिस्तान के दावों के विपरीत जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, अफगान बलों ने 203 मंसूरी कॉर्प्स और 201 खालिद बिन वालिद कॉर्प्स के माध्यम से पक्तिया, खोस्त, कुनार और तोरखम गेट जैसे क्षेत्रों में भारी जवाबी कार्रवाई की है। तालिबान का दावा है कि उन्होंने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान के एक मुख्यालय और 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है। फितरत ने यह भी दावा किया कि इस संघर्ष में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जिनमें से 23 के शव उनके कब्जे में हैं। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य वाहन जब्त करने की बात भी कही गई है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने किसी भी सैनिक के पकड़े जाने की खबरों का खंडन किया है।

ईरान की मध्यस्थता की पेशकश और कूटनीतिक प्रयास

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने शांति स्थापित करने के लिए अपनी सेवाएं देने की पेशकश की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान दोनों पड़ोसी देशों को बातचीत के जरिए अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए। अरागची ने जोर देकर कहा कि ईरान दोनों देशों के बीच संवाद को सुगम बनाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है। उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अच्छे पड़ोसियों की तरह व्यवहार करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की सलाह दी है।

पाकिस्तानी नेतृत्व का कड़ा रुख और आधिकारिक प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सेना की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि पाकिस्तान की शांति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना का जवाब निर्णायक है और देश की सुरक्षा के लिए कोई भी क्षेत्र पहुंच से बाहर नहीं होगा। वहीं, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए इसे 'खुली जंग' करार दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के धैर्य की सीमा समाप्त हो गई है और अब तालिबान को कड़ा जवाब दिया जा रहा है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी अफगान तालिबान द्वारा नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने की कड़ी निंदा की है।

सैन्य नुकसान और जमीनी स्थिति का विवरण

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में तालिबान के 2 कोर मुख्यालय, 3 ब्रिगेड मुख्यालय, 2 गोला-बारूद डिपो और 80 से अधिक सैन्य वाहन नष्ट किए गए हैं। इनमें टैंक, आर्टिलरी गन और आर्मर्ड पर्सनल व्हीकल शामिल हैं और दूसरी ओर, अफगानिस्तान ने दावा किया है कि उन्होंने एक इंटरनेशनल हार्वेस्टर गाड़ी और कई हल्के-भारी हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया है। डूरंड रेखा के आसपास के कई प्रांतों में अभी भी रुक-रुक कर गोलीबारी की खबरें आ रही हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।