प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली से फ्रांस के अपने आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं, जहां वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक विशेष मुलाकात तय की गई है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बैठक की पुष्टि करते हुए जानकारी साझा की है। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले दोनों नेताओं ने 13 फरवरी 2025 को एक-दूसरे से मुलाकात की थी। पेरिस में होने वाली इस बैठक को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के मुख्य एजेंडे और रणनीतिक चर्चा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज संकट के बीच होने वाली यह मुलाकात वैश्विक राजनीति के लिहाज से काफी अहम है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली इस बातचीत में व्यापारिक समझौतों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच एक संभावित ट्रेड डील को लेकर चर्चा हो सकती है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि शायद इस समिट के दौरान ही किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर न हों, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच कई जटिल तकनीकी मुद्दों पर विस्तार से बात की जाएगी।
ट्रेड डील और तकनीकी वार्ताओं का सिलसिला
अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि संभावित ट्रेड डील को लेकर पिछले एक साल से भारत के साथ काफी गहन और विस्तृत बातचीत चल रही है और इस साल की शुरुआत में दोनों देशों ने एक जॉइंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे, जो इस दिशा में एक बड़ा कदम था। बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कुछ हफ्ते पहले अमेरिका की एक विशेष टीम ने भारत का दौरा भी किया था। इसके अलावा, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी अगले हफ्ते स्वयं भारत का दौरा करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि इस प्रस्तावित डील को और कितना आगे बढ़ाया जा सकता है।
आर्थिक ढांचे और डेटा अप्रोच की चुनौतियां
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर कुछ बुनियादी चुनौतियां भी हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच पहले कभी कोई औपचारिक ट्रेड डील नहीं हुई है, जिसका एक मुख्य कारण दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के काम करने का अलग तरीका है। विशेष रूप से भारत में डेटा को लेकर जो दृष्टिकोण अपनाया जाता है, उसे अमेरिकी कंपनियां अपने व्यवसाय के लिए थोड़ा कठिन मानती हैं। G7 समिट के दौरान होने वाली इस बैठक में दोनों नेताओं के पास यह समझने का एक अच्छा अवसर होगा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत कहां तक पहुंची है और आने वाले हफ्तों में वे इस डील को पूरा करने की दिशा में कितना आगे बढ़ना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा केवल G7 समिट तक ही सीमित नहीं है। वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भी एक द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री स्लोवाकिया का भी स्टेट विजिट करेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का G7 शिखर सम्मेलन के बाद इस तरह का पहला दौरा होगा। प्रधानमंत्री का यह पूरा दौरा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत के वैश्विक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
