प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक दौरे पर निकल चुके हैं। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच के ऐतिहासिक और प्रगाढ़ संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। यह दौरा विशेष रूप से रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच 15 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार हो रहा है, जो एक संतुलित और अत्यंत मजबूत रणनीतिक साझेदारी का जीवंत प्रमाण है। इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनका लाभ सभी साझेदार देशों को प्राप्त होगा।
कूटनीतिक और रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह फ्रांस दौरा केवल एक कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है। इसका सीधा और गहरा प्रभाव रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाला है। पिछले कई वर्षों में भारत और फ्रांस के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं और दोनों देश एक-दूसरे को सबसे भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं और विशेष रूप से यूरोप में फ्रांस भारत का एक प्रमुख रणनीतिक मित्र बनकर उभरा है। फ्रांस भारत के लिए केवल एक रक्षा सप्लायर नहीं है, बल्कि वह एयरोस्पेस, परमाणु ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक के क्षेत्र में भी एक अनिवार्य भागीदार है। दूसरी ओर, भारत फ्रांस के लिए एक विशाल और उभरता हुआ बाजार है, जहां से उसे ऊर्जा उत्पाद, दवाइयां, मशीनरी और कपड़ा जैसे उत्पाद प्राप्त होते हैं।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग: राफेल से लेकर पनडुब्बियों तक
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग इस रिश्ते की सबसे मजबूत कड़ी है। जब भी फ्रांस का नाम आता है, तो सबसे पहले राफेल फाइटर जेट की चर्चा होती है, जिसने भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। हालांकि, यह सहयोग केवल राफेल तक सीमित नहीं है। इससे पहले मिराज 2000 विमानों ने भी भारतीय रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों का निर्माण भी इसी रक्षा सहयोग का एक बड़ा उदाहरण है। भारत फ्रांस से केवल विमान ही नहीं, बल्कि स्पेस से जुड़े पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, नेविगेशन सिस्टम, मेडिकल और ऑप्टिकल उपकरण और कई उच्च मूल्य वाले औद्योगिक सामान भी खरीदता है। रक्षा के मोर्चे पर मिसाइल, इंजन टेक्नोलॉजी और गाइडेड हथियारों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
व्यापार और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण
भारत और फ्रांस के बीच का व्यापार काफी संतुलित और विकासशील है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक रहा है। इसमें भारत का फ्रांस को निर्यात 7 अरब 14 करोड़ डॉलर रहा, जबकि फ्रांस से भारत का आयात लगभग 7 अरब 90 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 13 अरब डॉलर से अधिक था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि व्यापार में निरंतर वृद्धि हो रही है। भारत फ्रांस को मुख्य रूप से मिनरल फ्यूल, तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सामान, फार्मास्युटिकल उत्पाद और रेडीमेड गारमेंट बेचता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत से जूते-चप्पल, स्मार्टफोन, ज्वेलरी और एयरोस्पेस पार्ट्स भी फ्रांस को निर्यात किए जाते हैं।
निवेश और भविष्य की संभावनाएं
व्यापार के साथ-साथ दोनों देशों के बीच निवेश का ग्राफ भी ऊपर जा रहा है। फ्रांसीसी कंपनियां भारत में ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां भी फ्रांस के आईटी, ऑटो कंपोनेंट और स्टील सेक्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस से भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में रक्षा उत्पादन में संयुक्त निर्माण, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। पीएम मोदी का यह दौरा इन सभी क्षेत्रों में सहयोग के अगले चरण की नींव रखने का काम करेगा, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
