प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के करोड़ों छात्रों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। छात्रों के व्यापक आंदोलन और पेपर लीक की घटनाओं पर उपजे आक्रोश के बीच, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि इस अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार का लक्ष्य इन विशेष अदालतों के माध्यम से मामलों का त्वरित निपटारा करना है ताकि न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी को समाप्त किया जा सके और दोषियों को उनके किए की कठोर सजा जल्द से जल्द मिल सके।
इन चार राज्यों में स्थापित होंगी विशेष अदालतें
पीएम मोदी की इस घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ये फास्ट ट्रैक अदालतें कहां-कहां और कितनी संख्या में होंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश के चार प्रमुख राज्यों के उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में इन अदालतों को प्राथमिकता के आधार पर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसमें बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद और नागपुर बेंच, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार शामिल हैं। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि हाल के दिनों में पेपर लीक से जुड़े अधिकांश मामले इन्हीं न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक को लेकर सबसे ज्यादा केस बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर और औरंगाबाद बेंच और कलकत्ता हाई कोर्ट के ज्यूरीडिक्शन में दर्ज हैं। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार में छात्र आंदोलनों के दौरान हुए लाठीचार्ज से जुड़े मामले दर्ज हैं।
लोक परीक्षा अधिनियम 2024 और सख्त सजा का प्रावधान
पेपर लीक को रोकने और दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही 'The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act 2024' कानून बनाया है। यह कानून 21 जून 2024 से प्रभावी हो चुका है। इस कानून के तहत पेपर लीक रोकने के लिए सजा के प्रावधानों को अत्यंत कठोर बनाया गया है। इस कानून के दायरे में देश की प्रमुख भर्ती और परीक्षा एजेंसियां आती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS)
- केंद्र सरकार के मंत्रालय
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA)
फास्ट ट्रैक कोर्ट से क्या बदलेगा?
फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मामलों का 'स्पीडी ट्रायल' यानी त्वरित विचारण सुनिश्चित होगा और इन अदालतों में मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर की जाएगी, जिससे वर्षों तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया महीनों या दिनों में सिमट जाएगी। केंद्र सरकार ने इस संबंध में संबंधित राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को संदेश भेज दिया है कि वे फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर रोजाना सुनवाई शुरू करें। इससे न केवल दोषियों को जल्दी सजा मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों के मन में डर भी पैदा होगा।
प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई त्वरित अदालतों में होगी और उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई त्वरित अदालतों में होगी। " पीएम मोदी का यह बयान उन छात्रों के लिए एक बड़ा आश्वासन है जो लंबे समय से परीक्षाओं में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं। सरकार का यह कदम शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
