पीएम मोदी की 7वीं फ्रांस यात्रा: जानिए भारत के लिए क्यों खास है यह सदाबहार दोस्ती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रिकॉर्ड सातवीं फ्रांस यात्रा भारत और फ्रांस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती दे रही है। रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद साथी रहा है, जिसने 1998 के परमाणु परीक्षणों के दौरान भी भारत का साथ दिया था।

भारत और फ्रांस के बीच की दोस्ती आज के वैश्विक परिदृश्य में एक रणनीतिक मिसाल बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रिकॉर्ड 7वीं फ्रांस यात्रा इस गहरे संबंध को और अधिक मजबूती प्रदान करती है। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और वैश्विक मंचों पर फ्रांस ने हमेशा भारत का साथ दिया है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक, भारत के हर प्रधानमंत्री ने फ्रांस के साथ साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इंदिरा गांधी ने तो प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए फ्रांस को ही चुना था। वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी की लगातार यात्राएं देश की रणनीतिक जरूरतों और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप हैं।

फ्रांस भारत के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

पश्चिमी देशों की तुलना में फ्रांस के साथ भारत के संबंध कहीं अधिक गहरे और बिना किसी शर्त के रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण 1998 में देखने को मिला था, जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था। उस समय अमेरिका सहित कई शक्तिशाली देशों ने भारत पर कड़े आर्थिक और रणनीतिक प्रतिबंध लगा दिए थे, लेकिन फ्रांस ने भारत का साथ नहीं छोड़ा। फ्रांस ने न केवल उन प्रतिबंधों का विरोध किया बल्कि भारत की संप्रभुता का सम्मान करते हुए उसके आंतरिक मामलों में दखल देने से भी इनकार कर दिया। फ्रांस हमेशा से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का समर्थक रहा है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सहयोग

भारत अपनी सेना को आधुनिक बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए फ्रांस पर काफी निर्भर है। राफेल फाइटर जेट्स का सौदा इस साझेदारी का सबसे बड़ा और आधुनिक उदाहरण है। इसके अलावा, फ्रांस भारत को मेक इन इंडिया पहल के तहत उन्नत तकनीक साझा करने के लिए भी हमेशा तैयार रहता है। स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण भी इसी सहयोग का हिस्सा है। यह साझेदारी केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक का हस्तांतरण और संयुक्त निर्माण भी शामिल है, जो भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में साझा कदम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच का नाता दशकों पुराना और बेहद सफल रहा है। भारत के कई महत्वपूर्ण उपग्रहों को फ्रांस के एरियन रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया है और वर्तमान में दोनों देश विज्ञान के क्षेत्र में अपने सहयोग को और विस्तार दे रहे हैं और मिलकर मंगल तथा शुक्र अभियानों पर काम कर रहे हैं। यह वैज्ञानिक साझेदारी दोनों देशों को अंतरिक्ष अनुसंधान की अगली कतार में खड़ा करती है।

परमाणु ऊर्जा और वैश्विक कूटनीति

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रांस के साथ जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है। फ्रांस भारत को स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन में तकनीकी मदद प्रदान कर रहा है। वैश्विक मंच पर भी फ्रांस का महत्व भारत के लिए अद्वितीय है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य होने के नाते फ्रांस ने हमेशा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान या चीन ने भारत को घेरने की कोशिश की है, फ्रांस एक मजबूत ढाल बनकर भारत के साथ खड़ा रहा है।

आर्थिक, सांस्कृतिक संबंध और भविष्य का रोडमैप

यूरोप में फ्रांस भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए फ्रांस जाते हैं। सांस्कृतिक स्तर पर भी दोनों देश करीब आए हैं; फ्रांस में योग, आयुर्वेद और भारतीय खानपान की लोकप्रियता बढ़ रही है, जबकि भारत में फ्रांसीसी भाषा सीखने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। भविष्य के लिए दोनों देशों ने होराइजन 2047 नाम से एक रोडमैप तैयार किया है, जो रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर बनाया गया है। इसमें अंतरिक्ष सहयोग, हिंद महासागर में सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीकों पर अगले 25 सालों तक साथ मिलकर काम करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐतिहासिक यात्राओं का सिलसिला

प्रधानमंत्री मोदी का 7 बार फ्रांस जाना किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए एक रिकॉर्ड है, लेकिन इसकी नींव पुराने प्रधानमंत्रियों ने ही रखी थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 16 से 19 जनवरी 1951 में फ्रांस की पहली यात्रा की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पुदुचेरी का शांतिपूर्ण हस्तांतरण और विज्ञान में सहयोग था। नेहरू ने दोबारा 1962 में भी फ्रांस का दौरा किया। इंदिरा गांधी ने 1966 में प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली विदेश यात्रा फ्रांस की ही की थी और अपने कार्यकाल में कुल 3 बार वहां गईं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में 4 बार फ्रांस का दौरा किया, जिसमें 2005 की यात्रा और 2008 का नागरिक परमाणु समझौता भारत के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। पीएम मोदी ने 2015 में इंटरनेशनल सोलर अलायंस की शुरुआत और बैस्टिल डे परेड में मुख्य अतिथि बनकर इस दोस्ती को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।