80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, सिंधु जल संधि के निलंबन और आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख पर चर्चा की।

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया और सभी देशवासियों को इस ऐतिहासिक अवसर पर बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कुछ ही घंटों में देश की आजादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत होने जा रही है। राष्ट्रपति ने उन चुनौतियों को याद किया जो आजादी के समय देश के सामने थीं, विशेष रूप से राष्ट्र के एकीकरण की चुनौती और उन्होंने सरदार पटेल को एकता का शिल्पकार बताते हुए उनके योगदान को नमन किया। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि आज हम एक आधुनिक भारत बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं और हमारे छात्र इस भविष्य के निर्माता हैं।

ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कड़ा संदेश

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के अदम्य साहस का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक और प्रभावी हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। इसके साथ ही, उन्होंने आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले को राष्ट्रीय हित में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया और उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय विशेष रूप से हमारे किसानों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। आतंकवादियों को कड़ी चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकी और उनका समर्थन करने वाले चाहे कहीं भी छिप जाएं, उन्हें उनके किए का अंजाम भुगतना ही होगा।

आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक विकास की उपलब्धियां

देश की आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्रपति ने भारत को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों को एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि करार दिया। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में हो रहे तेज विकास और वहां के लोगों की बढ़ती सांस्कृतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए इसे एक सकारात्मक बदलाव बताया। वैश्विक अस्थिरता के दौर में भी भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर वैश्विक औसत विकास दर से दोगुनी से अधिक रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सही दिशा में बढ़ते कदमों का प्रमाण है।

डिजिटल क्रांति और जनकल्याणकारी योजनाएं

डिजिटल इंडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में से आधे से ज्यादा हिस्सा अब अकेले भारत में होता है। यह डिजिटल क्षेत्र में भारत की वैश्विक धाक को दर्शाता है। पिछले एक दशक में हुए समावेशी विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न पहलों के माध्यम से 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी के चंगुल से बाहर आए हैं। इसके अलावा, सरकार की मुफ्त राशन योजना 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने तीनों सेनाओं, सभी सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिस कर्मियों की कर्तव्य-निष्ठा की सराहना की और उन्होंने उन भारतीयों की भी प्रशंसा की जो वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ा रहे हैं और विदेशों में भारतीय दूतावासों में कार्यरत हैं।