देश में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ चल रही मुहिम में एक बड़ी सफलता मिली है और राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह महत्वपूर्ण विधेयक इसी सप्ताह राज्यसभा से पारित हुआ था और अब राष्ट्रपति की सहमति मिलने के साथ ही इसने कानून का रूप ले लिया है। इस नए कानून के लागू होने से अब पेपर लीक करने वालों का हिसाब महज तीन महीने के भीतर किया जा सकेगा, जिससे परीक्षा प्रणाली में युवाओं का भरोसा फिर से बहाल होने की उम्मीद है।
सजा के प्रावधान हुए और भी कठोर
पेपर लीक रोधी कानून में किए गए इस संशोधन के बाद सजा के प्रावधानों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त बना दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत अब पेपर लीक से जुड़े मामलों में अदालत को तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना होगा। दोषियों के लिए सजा की अवधि को बढ़ाकर 10 साल तक कर दिया गया है। इसके साथ ही, आर्थिक दंड के रूप में 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह विधेयक पेपर लीक के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की एक गंभीर कोशिश है और उन्होंने विश्वास जताया कि इस कानून से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता में बढ़ोतरी होगी।
संसदीय प्रक्रिया और शिक्षा मंत्री का बयान
यह संशोधन विधेयक लोकसभा में काफी हंगामे के बीच पारित हुआ था। विधेयक के पारित होने के बाद शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है, जो परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों से निपटने के लिए एक अत्यंत सख्त कानूनी ढांचा प्रदान करेगा। उन्होंने आगे कहा कि सख्त सजा, त्वरित अदालत, जांच के आधुनिक और बेहतर तौर-तरीके और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधानों वाला यह विधेयक प्रश्नपत्र लीक के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से लाया गया है।
नए कानून की प्रमुख विशेषताएं
नए कानून में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जो इसे पहले के कानूनों से अलग और अधिक प्रभावी बनाते हैं। अब हर राज्य में पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी ताकि 90 दिन के भीतर ट्रायल की प्रक्रिया पूरी कर सजा का ऐलान किया जा सके। यह कदम न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए उठाया गया है।
2024 के कानून और नए संशोधन में अंतर
वर्ष 2024 के कानून की तुलना में नए संशोधन में सजा और जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की गई है। जहां 2024 के कानून में 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 5 से 10 साल तक कर दिया गया है। जुर्माने की राशि में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2024 के कानून में पेपर लीक के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह कठोर दंड अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए तय किया गया है।
जांच प्रक्रिया में बड़े बदलाव
जांच के स्तर पर भी इस कानून में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। पहले पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच केवल सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी द्वारा की जाती थी, लेकिन अब इन मामलों की विशेष जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2024 के कानून में जांच पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी। नए संशोधन में इस कमी को दूर करते हुए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच हर हाल में 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
