अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से बदलने और इसे और अधिक पेशेवर बनाने के लिए तिरुपति मंदिर के प्रबंधन मॉडल को अपनाने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सोमवार को आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक में ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए एक तीन सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन का ऐलान किया। यह कदम राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है, जिसने ट्रस्ट को अपनी प्रबंधन व्यवस्था पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
ट्रस्ट द्वारा गठित इस विशेष चयन समिति में न्यायपालिका और भारतीय सशस्त्र बलों के अत्यंत अनुभवी और सम्मानित अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस समिति के सदस्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सुरेश हावड़े के नाम शामिल हैं। इस समिति का मुख्य कार्य CEO पद के लिए सबसे योग्य और सक्षम उम्मीदवारों की पहचान करना और उनके नामों की सिफारिश ट्रस्ट को करना है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर के प्रशासन में पारदर्शिता, अनुशासन और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को लाना है।
इस्तीफों की स्वीकृति और नई प्रशासनिक व्यवस्था
लगभग तीन घंटे तक चली इस गहन चर्चा वाली बैठक में ट्रस्ट ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इन दोनों प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद आए हैं, जिसने भक्तों के बीच काफी चिंता पैदा कर दी थी और ट्रस्ट की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृष्ण मोहन को मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि मंदिर के दैनिक कार्यों और निर्माण कार्यों में कोई बाधा न आए।
बैठक के समापन के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया कर्मियों को संबोधित किया और इन महत्वपूर्ण बदलावों की पुष्टि की और उन्होंने बताया कि यह बैठक दोपहर 3:15 बजे राम जन्मभूमि परिसर के भीतर स्थित गेस्ट हाउस में शुरू हुई थी और शाम करीब 6:30 बजे तक चली। इस दौरान ट्रस्ट के भविष्य के रोडमैप और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रबंधन की विफलताओं पर आत्ममंथन
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित अनियमितताओं और उसके बाद उत्पन्न हुई स्थितियों का विश्लेषण करना था। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि ट्रस्ट के मौजूदा प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों में कुछ गंभीर कमियां रही हैं। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि चोरी की इन खबरों ने दुनिया भर के करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है।
" उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट अब अपनी गलतियों से सीख रहा है और तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार कर रहा है। तिरुपति मॉडल अपनी कुशलता और पारदर्शिता के लिए जाना जाता है, और ट्रस्ट को विश्वास है कि एक पेशेवर CEO की नियुक्ति से भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सकेगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख सदस्य और अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। बैठक की कार्यसूची और एजेंडा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी द्वारा प्रस्तुत किया गया और ट्रस्ट के कुल नौ स्थायी सदस्यों में से सात सदस्य इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
बैठक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहने वाले सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
- महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष)
- गोविंद देव गिरी (कोषाध्यक्ष)
- विश्व तीर्थ प्रसन्नाचार्य (सदस्य)
- स्वामी परमानंद गिरी (सदस्य)
- जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती (सदस्य)
- कृष्ण मोहन (अंतरिम महासचिव)
- महंत दिनेंद्र दास (सदस्य)
- शशांक त्रिपाठी (जिलाधिकारी और पदेन सदस्य)
- दिनेश चंद्र (विहिप नेता)
- महंत कमल नयन दास (विशेष आमंत्रित)
इसके अलावा, कई अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस बैठक में हिस्सा लिया और अपने सुझाव दिए। इनमें ट्रस्ट के संयोजक के परासन, उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, केंद्रीय सचिव प्रशांत लोखंडे और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा शामिल थे। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा इस बैठक से अनुपस्थित रहे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह भक्तों द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कड़ा कदम उठाएगा।
